94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जानकारी और ज्ञान है, बताना चाहूँगा कि इस संशोधन मं ेकिसी प्रकार के गोलमाल होने का जरा सा भी साक्ष्य नहीं है। जो संशोधन, मैंने चाहा है उसमें केवल दो बातें हैं। एक उन त्रुटियों को ठीक करना है, जो किसी किस्म की अनवधाता के कारण हुई हैं। कुछ थाने जिनका उल्लेख होना चाहिए था समुचित स्थान पर नहीं हुआ है और कुछ अन्य थाने या कुछ अन्य स्थानों का उसकी जगह उल्लेख किया गया है। दूसरी बात यह है कि यह पता चला है कि इन मामलों में से कुछ में, जहाँ सामीप्य संभव था, किसी प्रकार की भूल से एक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरे में कुछ स्थानों के अनवधानता से मिलने से सामीप्य का सिद्धांत खत्म हो गया है और इस संशोधन में इन दो त्रुटियों को दूर करने का प्रयास किया गया है; अर्थात् भौगोलिक किस्म की भूल और द्वितीयतः ऐसी भूल जिससे कुछ मात्रा में असामीप्य आ गया है।
पंडित कुंजरू : क्या मैं अपने माननीय मित्र से यह पूछ सकता हूँ कि क्या वह यह बात अपने स्वयं के संशोधन के संदर्भ में कह रहे हैं या राष्ट्रपति के आदेश में संशोधन की बाबत? यदि वे राष्ट्रपति के आदेश के संदर्भ में कह रहे हैं तो मैं उनसे गढ़वाल निर्वाचन क्षेत्र में प्रस्तावित परिवर्तन की ओर ध्यान देने के लिए कहना चाहूँगा और वे बताएं कि सामीप्य को पुनः स्थापित करने का प्रश्न कहाँ विद्यमान है। सुझाए गए निर्वाचन क्षेत्रों के अनेक भागों के बीच सामीप्य है। मैं जानता हूँ कि स्थानीय मामले पर विचार करना उनके लिए बहुत कठिन है किंतु मैं उनको केवल यह इंगित करने के लिए उल्लेख करता हूँ कि सुझाए गए परिवर्तन उनके द्वारा उल्लिखित कारणों से सम्पूर्णतः सम्यक नहीं हैं।
डॉ. अम्बेडकर : महोदय, क्या मैं जारी रख सकता हूँ?
आपको याद होगा कि पिछली बार जब परिसीमन की बाबत राष्ट्रपति का आदेश इस सदन द्वारा पारित किया गया था तो सावधानी के तौर पर मैंने यह प्रस्ताव रखा था कि सदन के अध्यक्ष को ऐसे परिवर्तन करने की शक्ति दी जानी चाहिए जो कुछ त्रुटियों को दूर करने के लिए वह आवश्यक समझें।
श्री कॉमथ : मौखिक त्रुटियाँ, मौखिक संशोधन।
10.00 बजे पूर्वाह्न
डॉ. अम्बेडकर : मौखिक, गौण, परिणामिक या आनुषंगिक मेरे विचार में यही शब्द प्रयुक्त किए गए थे। मैं प्रतिपादना इतनी व्यापक करने में बहुत सावधान था जितना मैं इस साधारण कारण से कर सकता था कि सदन याद रखेगा कि बहुत जल्दी में और बड़ी हड़बड़ी में और बैठकों और बैठकों और फिर बैठकों में पास किया था।
इस बात के होते हुए भी कि यह पता चला है कि हम भी उन त्रुटियों के संबंध में जो हो गई थीं, अध्यक्ष को सलाह देने की स्थिति में नहीं थे। इसलिए कुछ त्रुटियाँ