95
रह गई थीं और हमने सोचा कि यह उचित अवसर है उन त्रुटियों को दूर करने के लिए कुछ उपबंध बनाने का। ये त्रुटियाँ स्थानीय सरकारों की संवीक्षा, विधि मंत्रालय की संवीक्षा और अध्यक्ष की संवीक्षा के होते हुए भी रह गई थीं। मैं नहीं सोचता मेरे माननीय मित्र पंडित कुंजरू यहाँ तक कहेंगे कि हमने राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए आदेशों को एक बार में ही पारित कर दिया था, हमें किन्हीं त्रुटियों को जो फिर भी आदेशों में रह सकती हैं, दूर करने के लिए आगे कोई अवसर नहीं लेना चाहिए।
उस विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र की बाबत जिसका उन्होंने हवाला दिया है, उनका यह सुझाव अच्छा था कि मैं स्वयं अपनी जानकारी या ज्ञान से उस बात का सही उत्तर देने की स्थिति में नहीं हूँ कि क्या कोई विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र उस संशोधन से संसक्तता है जो हम इस परिसीमन आदेश में करने जा रहे हैं। इस मामले में हमें स्थानीय सरकार पर निर्भर रहना है। जैसा उन्हें याद होगा मैंने उन आधारों पर मुझे सहायता और सलाह देने के लिए उत्तर प्रदेश परिसीमन समिति के सदस्यों की बैठक बुलाने में विशेष सावधानी बरती थी, जो उत्तर प्रदेश परिसीमन आदेशों में ये परिवर्तन करने के लिए अभिकथित किए गए हैं, अर्थात् त्रुटियों को ठीक करना और संसक्त्ता को अपेक्षाकृत अधिक संभव बनाना, किंतु दुर्भाग्यश, वे उस बैठक में नहीं आ सके थे। वह उत्तर प्रदेश परिसीमन समिति के अध्यक्ष थे। और यदि हमें दी गई उस सलाह के होते हुए वह यह दलील देते हैं कि कुछ ऐसी चीज की गई है, जो संसक्ता उत्पन्न नहीं करती, मैं जो कुछ कह सकता हूँ वह यह है कि दोष उनके कंधों पर ही होना चाहिए क्योंकि वे मुझे इस बारे में सलाह देने के लिए बैठक में नहीं आए थे कि जो मैं कर रहा हूँ वह ठीक है या नहीं।
पंडित कुंजरू : मुझे ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला था।
डॉ. अम्बेडकर : मेरे विचार में मैंने अपने माननीय मित्र को संदेश भेजा था। मेरे
| vEcsM | dj |
|---|
माननीय मित्र ने इसे टिप्पणी के साथ वापिस भेजा दिया था कि उन संशोधनों की बाबत जो मैं श्री गोपीनाथ से स्वीकार कर रहा था, वह उस संशोधन का समर्थन करने के लिए पूर्ण रूप से तैयार हैं।
पंडित कुंजरू : मुझसे केवल................ की बाबत सलाह ली गई थी।
डॉ. अम्बेडकर : उनकी प्रेस विधेयक में अधिक रुचि थी।
| vEcsM | dj |
|---|
पंडित कुंजरू : .............लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अधीन अध्यक्ष द्वारा विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के लिए नियुक्त समिति द्वारा सुझाव किए गए थे और मैंने उनकी बाबत उत्तर दिया था। अन्य परिवर्तनों की बाबत यदि उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्रीय सरकार को उन कारणों को प्रस्तावित करने के लिए सूचित कर दिया था तो मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर ने उन कारणों को सदन के समक्ष क्यों नहीं रखा।