41. निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन के बारे में प्रस्ताव - Page 113

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री टी. एन. सिंह (उत्तर प्रदेश) : यदि परिसीमन समिति के सदस्य के रूप में

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मुझे बोलने की इजाजत दी जाए तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि इस अधिसूचना में प्रस्तावित परिवर्तन और माननीय विधि मंत्री द्वारा यथा प्रस्तावित बिल्कुल पारिणामिक या आनुषंगिक नहीं है। मैंने उन अनेक परिवर्तनों को, जिनका प्रस्ताव किया जा रहा है, ध्यानपूर्वक देखने का प्रयास किया है। उदाहरणार्थ, बनारस जिले को लें, जिसके बारे में पूर्णतः परिचित हूँ। मैं नहीं जानता किस कारण एक अन्य परगना जोड़ा गया है, जिसका अर्थ मतदाताओं की संख्या में वष्द्धि है। गढ़वाल के बारे में मैं नहीं जानता, इसी तरह चमोली को क्यों अलग किया जा रहा है।

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श्री टी. एन. सिंह : यह देहरादून नहीं है। यह गढ़वाल है।

श्री त्यागी : मैं समान रूप से रुचि रखता हूँ।

श्री टी. एन. सिंह : इसी प्रकार कानपुर की बाबत, फर्रुखाबाद सामान्य निर्वाचन क्षेत्र, प्रस्तावित परिवर्तनों पर ध्यानपूर्वक विचार करने की जरूरत है।

इन सभी प्रश्नों पर विस्तार से विचार करने के बारे में सोचता हूँ कि सदन के लिए यह अनुचित होगा यदि इस प्रश्न के सभी पहलुओं पर विचार करने के लिए अनुज्ञात नहीं किया जाता है, इस संबंध में मैं सदन को यह बताना चाहूँगा कि अपने अध्यक्ष के मार्गदर्शन में हमने प्रश्न को हर विस्तार से देखा, हमने प्रत्येक गांव के प्रत्येक पटवारी सर्किल के सीमांकन पर विचार किया और इसमें बहुत समय लगाया......। किंतु इस समय अंधकार में होने के कारण और बिना यह जाने कि वास्तविक अर्थ क्या है, मैं संशोधन का समर्थन करने के लिए वास्तव में बहुत कठिनाई पाता हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : प्रथम संशोधन के बारे में यह स्थिति है, अर्थात् पष्ष्ठ 1 पर पैरा 2 ( ii ) में ‘‘किंतु मोहम्मदी को सम्मिलित करते हुए’’ शब्दों के बाद ‘‘अटवा पिपरिया’’ शब्द अंतःस्थापित किए जाएं। वहाँ एक स्थान है जो अटवा पिपरिया कहा जाता है जिसका मूल आदेश में बिल्कुल भी उल्लेख नहीं है। उससे भारत के नागरिकों का अभिप्राय है, जो अटवा पिपरिया में रह रहे हैं, निर्वाचन में भाग लेने के बिल्कुल हकदार नहीं होंगे, क्योंकि वे उस विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र का भाग नहीं हैं। इस गलती को सुधारने के लिए यह प्रस्ताव किया गया है कि इसे जोड़ा जाना चाहिए। अब जब यह जोड़ दिया गया है, तो अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी कुछ पारिणामिक संशोधन किए जाने चाहिए ताकि उन्हें हमारे संविधान में अधिकथित नियमों के अनुरूप बनाया जा सके। प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में अवश्य ही मतदाताओं की कुछ संख्या होनी चाहिए और तदनुसार प्रतिनिधित्व वितरित होना चाहिए।