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जैसे मुझे अब सलाह दी गई है, मुख्य संशोधन केवल अटवा पिपरिया की बाबत है। उनमें से शेष मात्र पारिणामिक है। उनमें कोई सार नहीं है सिवाय इस तथ्य के कि वे किए जाने चाहिए। यदि हम प्रथम संशोधन को स्वीकार कर लेते हैं, अर्थात् ‘‘अटवा पिपरिया’’ जोड़ने के लिए। मैं समझता हूँ माननीय सदस्य यह स्पष्ट अनुभव करेंगे कि प्रथम संशोधन नितांत अनिवार्य है क्योंकि हम किसी विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्र से किसी विशिष्ट भाग का लोप नहीं कर सकते। यदि हम उस निर्वाचन क्षेत्र में कुछ जोड़ना चाहते हैं और वह निर्वाचन क्षेत्र एकल सदस्य को देने के लिए अनुध्यात निर्वाचन क्षेत्र से बड़ा हो जाता है तो प्रत्यक्षतः अन्य परिवर्तन भी अवश्य किए जाने चाहिए। मैं केवल अपने मित्र को स्पष्ट कर रहा हूँ कि इसमें बिल्कुल भी दम नहीं है।
श्री टी. एन. सिंह : अन्य स्थानों के बारे में क्या स्थिति है। अन्य निर्वाचन क्षेत्र भी हैं जिनमें महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रकट होते हैं, जिनके बारे में मुझे बताया गया है। उदाहरण के लिए बनारस के सामने यह ‘‘शिवपुर परगना और देहात अमानत परगना बनारस की नगरपालिका और छावनी को छोड़कर है। उन्हें पुनः लीजिए ( V ) : ‘‘बनारस तहसील के जलहुपुर, सुलतानी पुर और कटेहर परगना।’’ पहले मैंने सोचा था कि केवल सुलतानपुर और कटेहर परगना हैं। आपने एक पूरा परगना जोड़ दिया है। मैं जानना चाहता हूँ इस परिवर्तन का क्या कारण है।
माननीय उपाध्यक्ष : अब मैं इसे सदन में रखूंगा। प्रश्न है :-
कि 20 सितंबर, 1951 को पटल पर रखे गए संसदीय और विधानमंडल निर्वाचन क्षेत्र (उत्तर प्रदेश) (संशोधन) परिसीमन आदेश, 1951 में निम्नलिखित उपांतर किए जाएं, अर्थात् :-
(1) कि पष्ष्ठ 1 पर पैरा 2 ( iii ) में ‘‘किंतु मोहम्मदी सहित’’ शब्दों के बाद
‘‘अटवा पिपरिया’’ शब्द अंतःस्थापित किए जाएं।
(2) कि पृष्ठ 1 पर पैरा 2 ( ii ) में ‘‘(मोहम्मदी को छोड़कर)’’ कोष्ठक और शब्दों
के बाद, ‘‘अटवा पिपरिया’’ शब्द अंतःस्थापित किए जाएं।
(3) कि पृष्ठ 2 पर पैरा 3( i ) में तालिका में स्तंभ 1 में ‘‘(उत्तरी) तथा (पूर्वी)
चमोली’’ प्रविष्टि के स्थान पर निम्नलिखित रखा जाए, अर्थात् :-
‘‘पौड़ी (दक्षिणी) और चमौली (पूर्वी)’’
‘‘( iii क ) स्तंभ 1 में ‘‘मोहम्मदी (पश्चिमी)’’ और ‘‘मोहम्मदी (पूर्वी)’’ प्रविष्टियों के स्थान पर और स्तंभ 2 में उनके सामने प्रविष्टियों के स्थान पर निम्नलिखित प्रविष्टियाँ रखी जाएं, अर्थात् :-