42. सभा का कार्य - Page 118

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वाला वक्तव्य दे सकता है। आज मुझे इस प्रयोजन के लिए उस नियम को निलंबित करना है और मैं ऐसा करूंगा मैंने केवल यह सुझाव दिया है कि इसे 6 बजे तक स्थगित रखा जाए। बस, इतनी सी बात है।

डॉ. अम्बेडकर : अभी क्यों नहीं?

माननीय उपाध्यक्ष : मैं 6 बजे मंत्री महोदय की बात सुनूंगा।

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डॉ. अम्बेडकर : मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि मेरे वक्तव्य को 6 बजे तक क्यों टाला जा रहा है।

माननीय उपाध्यक्ष : किसी मंत्री द्वारा कोई वक्तव्य दिये जाने से पूर्व, नियमों

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के अनुसार माननीय अध्यक्ष की सहमति अपेक्षित है। मैं जानना चाहूँगा कि माननीय मंत्री क्या वक्तव्य देना चाहते हैं। निःसंदेह, इसमें मेरी सहमति अपेक्षित है। मैं उसके बारे में सदन को कुछ नहीं बताने वाला, इसकी कोई व्यवस्था भी नहीं है। मैं मंत्री महोदय से अनुरोध करूंगा कि वह अपने वक्तव्य की एक प्रति मुझे दे दें और मैं उनको मध्याह्न पश्चात् वक्तव्य देने की अनुमति दे दूंगा।

डॉ. अम्बेडकर : यदि यह बात थी, तो मैं जब आप से मिला था, आप मुझे तभी बता सकते थे। मैं आपको, आपके द्वारा अनुमति दिए जाने से पूर्व, अपने वक्तव्य की एक प्रति दे देता। आपने मुझे बताया ही नहीं।

माननीय उपाध्यक्ष : अभी कुछ नहीं बिगड़ा है।

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डॉ. अम्बेडकर : मैं आ गया और इसके बाद मैंने एक पत्र लिखा था किंतु जहाँ तक मेरा संबंध है, आपने मुझे यह नहीं बताया कि वक्तव्य देने की अनुमति देने के बारे में निर्णय करने से पूर्व मुझे अपने वक्तव्य की एक प्रति आपको देनी चाहिए और मैंने नियम 128 को पढ़कर देखा है और उसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके अनुसार अध्यक्ष को, उनके द्वारा सहमति दिये जाने से पूर्व, वक्तव्य की एक प्रति दिया जाना अपेक्षित हो। प्रधानमंत्री ने मुझे अपने वक्तव्य की एक प्रति देने को कहा था और मैंने उनको उसकी एक प्रति दे दी है। यदि आप भी मुझे आदेश देते कि आपको, यह निर्णय करने से पूर्व कि क्या वक्तव्य दिये जाने की अनुमति दी जाए अथवा न दी जाए, उससे पूर्व वक्तव्य की एक प्रति आपको दी जानी अपेक्षित है तो मैं सहर्ष ऐसा करता किंतु जब मैं आपके पास आया था तब आपने इस बात की ओर कोई संकेत नहीं दिया था। मेरे विचार में, कठिनाई यह थी कि नियमों के अनुसार प्रश्नकाल के तुरंत बाद वक्तव्य दिया जाना चाहिए और प्रधानमंत्री की उत्कट इच्छा थी कि मैं कुछ काम संपन्न कर लूं जो संभवतः अन्य सदस्यों को करने में कठिनाई होती क्योंकि इसमें कुछ पेचीदा समस्याएं अंतनिर्हित थीं। मैं इस बात पर सहमत हो गया और फिर मैं आपके पास आया और आपसे पूछा कि क्या