102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
आप कृपया नियमों को निलंबित करेंगे जिससे मैं कार्य निष्पादन में प्रधानमंत्री की सहायता कर सकूं? आपने तब भी मुझे नहीं बताया कि मुझे वक्तव्य देने की अनुमति देने से पूर्व मुझे अपने वक्तव्य की एक प्रति आपको देनी होगी और आपने पहली बार अब यह बात कही है।
पंडित कुंजरू : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या पीठासीन अध्यक्ष द्वारा उसका निरीक्षण कर उसमें कांट-छांट की जा सकती है, जैसा कि आपने कहा है?
माननीय उपाध्यक्ष : जी, हाँ। पीइासीन अध्यक्ष इस विचार से सेंसर कर सकता
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है कि सदन के समक्ष कोई ऐसा पाठ नहीं रखा जाना चाहिए जो निंदात्मक हो, मानहानिपूर्ण हो, अप्रासंगिक हो, आदि आदि (व्यवधान)। शांति, शांति, मैं पूछे गए प्रश्न का केवल उत्तर दे रहा हूँ। निश्चय ही, मैं ऐसा कर सकता हूँ। मैं अप्रासंगिक टिप्पणियों तथा अनुचित वक्तव्यों की अनुमति नहीं दे सकता। मैं अपने आपकी नियम 128 तक सीमित रखना चाहूँगा और यदि कोई माननीय मंत्री सभा में कोई वक्तव्य देना ही चाहता है, और मैं महसूस करता हूँ कि वक्तव्य में शिष्टाचार का अभाव है, अथवा मेरे विचार में वह अप्रासंगिक है तो मैं कह सकता हूँ, कि सभा कार्यविधि के अनुसार चले। यह मेरा अधिकार है। अन्यथा इस नियम का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।
जहाँ तक मंत्री महोदय को अनुमति दिये जाने का संबंध है मैं स्वीकार करता हूँ कि वह मेरे पास आए थे। संभवतः उनकी स्मरण शक्ति कमजोर हो गयी है। उन्होंने मुझे ऐसा कोई सुझाव नहीं दिया था कि मैं नियमों के अधीन स्थायी आदेशों को निलंबित कर सकता हूँ। मैं उनकी बात को स्वीकार करना चाहता था और मैंने उन्हें बताया था कि मैं उन्हें किसी भी समय, जब वह चाहेंगे, वक्तव्य देने की अनुमति दे दूॅंगा और मैंने यह भी कहा था कि मैं आदेशों को निलंबित कर सकता हूँ। उन्होंने इस बात को स्वीकार कर लिया था। अब भी, उनके द्वारा वक्तव्य दिए जाने के दौरान यदि मैं समझूंगा कि ऐसा वक्तव्य नहीं दिया जाना चाहिए तो मैं निश्चित ही कह सकता हूँ कि उसमें से किसी भाग विशेष को कार्यवाही-वृतान्त में से निकाल दिया जाए। इस बात से बचने के लिए मैं जानना चाहता हूँ कि वास्तव में वक्तव्य में क्या लिखा है। वह नियमों के विरुद्ध और अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं होना चाहिए। मैं नियम को निलंबित करके उनको वक्तव्य देने की अनुमति देने के लिये तैयार हूँ, वह प्रश्न काल के तुरंत बाद अपना वक्तव्य दे सकते हैं। मैं अपनी बात पर कायम हूँ। मेरी स्थिति वही है और चूंकि मेरे लिए यह रास्ता खुला है कि माननीय मंत्री जब वक्तव्य दे रहे होंगे तो मैं इस बात पर नज़र रखूंगा कि इस तरह की कोई बात सदन के समक्ष न लाई जाए। मैंने उनसे केवल इतना ही कहा था कि अब चूंकि समय है, मुझे वक्तव्य की एक प्रति दे दें। मुझे पता चला है