42. सभा का कार्य - Page 120

103

कि उन्होंने प्रधानमंत्री, सभा के नेता को वक्तव्य की एक प्रति दे दी है। किंतु सभा के अध्यक्ष के पास सदन का पूरा विशेषाधिकार, सम्मान, शिष्टाचार आदि सब कुछ रहता है। इसलिए, इस संबंध में जहाँ तक अध्यक्ष का संबंध है, कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। मैं नियम के विरुद्ध-कुछ नहीं कर रहा हूँ। वक्तव्य देने की स्वतंत्रता के संबंध में मैं सभा अथवा माननीय सदस्यों के सम्मान को ठेस पहुंचाए बिना अपने अधिकार का प्रयोग कर रहा हूँ। मैं मंत्री महोदय को 6 बजे अपना वक्तव्य देने की अनुमति दूँगा।

श्री कॉमथ : क्या यह सच नहीं है कि नियमों के अनुसार, किसी मंत्री या सदस्य को, अप्रासंगिकता के आधार पर अथवा अन्यथा नियम का पालन करने के लिए कहा जा सकता है किंतु वक्तव्य को पहले से सेंसर नहीं किया जाना चाहिए?

माननीय उपाध्यक्ष : यह बात नहीं है, मेरे विचार में, नियमों के अधीन मुझे उस वक्तव्य को देखने का अधिकार है, जो मंत्री महोदय द्वारा सदन में दिया जाने वाला है।

डॉ. अम्बेडकर : मैं इस बात को इस रूप में लेता हूँ, कि आप मुझे वक्तव्य देने की अनुमति नहीं देना चाहते, मैं आपके विनिर्णय का यही अर्थ लगाता हूँ। मैं अब मंत्री नहीं हूँ। मैं बाहर जा रहा हूँंं। मैं इस प्रकार के आदेश के आगे झुकने वाला नहीं।

पंडित कुंजरू : क्या मैं पूछ सकता हूँ कि जब श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने त्याग-पत्र दिया था तब क्या माननीय अध्यक्ष ने उनके वक्तव्य की प्रति सदन में उनके द्वारा दिये जाने से पूर्व मांगी थी।

माननीय उपाध्यक्ष : उन्होंने माननीय अध्यक्ष से बात की थी और उन्होंने माननीय अध्यक्ष को बता दिया था कि वह सदन में क्या कहना चाहते हैं।

सदन में ही सारी चर्चा हुई थी। अब सदन अगली मद पर विचार करेगा।

पंडित कुंजरू : उनको भाषण की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

माननीय उपाध्यक्ष : उसकी आवश्यकता नहीं थी।

श्री कॉमथ : कुछ भी हो, हम तो वक्तव्य से वंचित रह गए।

माननीय उपाध्यक्ष : यह बात उन पर छोड़ दी गयी थी। अब माननीय सदस्यों को अवगत कराया जाता है कि वह वक्तव्य नहीं देंगे।

*****