106 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय उपाध्यक्ष : मेरे विचार में, कोई माननीय सदस्य किसी अन्य सदस्य की ओर से नहीं बोल सकता और मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि क्या डॉ. देशमुख डॉ. अम्बेडकर की ओर से प्राधिकृत हैं।
डॉ. देशमुख : बिल्कुल नहीं।
माननीय उपाध्यक्ष : यद्यपि उन्होंने मंत्री के रूप में त्याग-पत्र दिया है, वह अब भी इस सदन के सदस्य हैं। हम सच में अपेक्षा करते हैं, जब उन्होंने उपाध्यक्ष से नोटिस पर ध्यान न देने को कहा था, तो उपाध्यक्ष, उस पर सहमत हो गए थे और वक्तव्य देने के लिये सांय 6 बजे का समय निश्चित कर दिया था, हमें आशा थी कि वह 6 बजे यहाँ पर उपस्थित रहेंगे और अपने विचार व्यक्त करेंगे। यह तो उनकी इच्छा थी कि वह वक्तव्य देते या न देते किंतु वह अपनी सीट पर ही नहीं हैं। प्रधानमंत्री एक वक्तव्य देना चाहते हैं।
श्री जवाहरलाल नेहरू : मैं उनका त्याग-पत्र सभा में पढ़ना चाहता हूँ, क्योंकि सामान्य तौर पर किसी मंत्री का वक्तव्य उसके त्याग-पत्र से संबंधित होता है।
डॉ. देशमुख : जब हमारे पास वक्तव्य ही नहीं है तो इसकी क्या उपयोगिता है?
माननीय उपाध्यक्ष : इसकी प्रासंगिकता इस प्रकार है। हम मंत्रियों को सदन से मिलवाते हैं जब कोई मंत्री प्रधानमंत्री के निर्देश पर, परामर्श से नियुक्त किया जाता है तो प्रधानमंत्री किसी त्याग-पत्र को भी सदन में पढ़ सकते हैं।
डॉ. देशमुख : किसी सदस्य को वक्तव्य देने का विशेषाधिकार प्राप्त है। यदि उसको क्रियात्मक रूप नहीं दिया जा रहा तो पता नहीं, आप किन नियमों के अधीन आगे कार्यवाही करने पर विचार कर रहे हैं और किसी अन्य वक्तव्य की क्या आवश्यकता है।
माननीय उपाध्यक्ष : यह सदा पीठासीन अध्यक्ष के स्वविवेक पर निर्भर करता है, वह सरकार की ओर से कोई भी वक्तव्य दिए जाने की अनुमति दे सकते हैं।
डॉ. देशमुख : मैं इस पर आपत्ति नहीं कर रहा हूँ। मैं तो इतना कह रहा हूँ, कि इसका आज सुबह उत्पन्न हुई स्थिति से क्या वास्ता है।
माननीय उपाध्यक्ष : यदि सरकार किसी विषय विशेष के संबंध में स्पष्टीकरण देना चाहती है, जिस मामले में सभी सदस्य रुचि लेते हों उसकी अनुमति दी जानी चाहिए।
श्री जवाहरलाल नेहरू : महोदय, जैसा कि आपको विदित है जहाँ तक मेरा संबंध है, मैं सम्मानपूर्वक कह सकता हूँ कि मुझे आशा थी कि वह अपना वक्तव्य देंगे। मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि निश्चित समय पर वक्तव्य नहीं दिया