43. डॉ. अम्बेडकर का त्याग पत्र - Page 124

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जाएगा अथवा आप कोई अन्य समय निर्धारित करेंगे। जो कुछ हुआ है, मुझे इसकी कदापि आशा नहीं थी। किंतु चूंकि अब यह हो गया है और वक्तव्य समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो चुका है या होने वाला है तो मेरे विचार में सदन अब पत्राचार की जानकारी प्राप्त करने का इच्छुक होगा, जिसका आदान-प्रदान हुआ है। इस संबंध में वक्तव्य का बिल्कुल उल्लेख नहीं कर रहा हूँ बल्कि मैं उन पत्रों का उल्लेख कर रहा हूँ जिनका आदान-प्रदान मेरे और डॉ. अंबेडकर के बीच में हुआ है।

मुझे लिखे गए पत्र में उनके त्याग-पत्र का कोई जिक्र नहीं है और वह 10 अगस्त, 1951 को लिखा गया था।

यह इस प्रकार है :-

नई दिल्ली

तारीख 10 अगस्त, 1951

प्रिय प्रधान मंत्री,

मुझे अपने स्वास्थ्य के बारे में बहुत चिंता हो रही है और मेरे डॉक्टर भी चिंति हैं। वे इस बात पर जोर देते हैं कि मैं उनको लगातार इलाज करने के लिए लगभग एक महीने का लंबा समय दूं और इस इलाज को अब और टाला नहीं जा सकता क्योंकि ऐसा करने से और पेचीदगियाँ बढ़ सकती हैं। मैं बहुत चाहता हूँ कि इसके पूर्व कि मैं डॉक्टरों की सलाह मानकर अपना इलाज शुरू करूं, हिंदू संहिता विधेयक का निपटान हो जाता। इसलिए मैं हिंदू संहिता विधेयक को अधिक प्राथमिकता देना चाहता हूँ, इस पर 16 अगस्त को विचार आरंभ करके, यदि विरोधी पक्ष के लोग इसके मार्ग में बाधाएॅं डालने के तरीके न अपनाएं, तो 1 सितम्बर तक इस पर निपटान तो किया जा सकता है। आपको पता है कि मैं इस विधेयक को बहुत अधिक महत्व देता हूँ और मैं इसको पास करवाने के लिए अपने स्वास्थ्य का कोई भी जोखि़म उठा सकता हूँ, किंतु यदि इस विधेयक को पास करवाकर जोखिम पहले ही टाला जा सके तो मेरे विचार में आपको कोई आपत्ति नहीं होगी। 16 अगस्त को प्रस्ताव रखते समय मैं सभी तात्कालिक विधेयकों जैसे पंजाब, अध्यादेशों और श्री गोपालास्वामी अय्यंगार के नाम ‘ग’ राज्यों संबंधी विधेयकों की प्राथमिकता को भी ध्यान रख रहा हूँं।

मैं यह इसलिये लिख रहा हूँ क्योंकि मुझे पता चला है कि पार्टी की पिछली बैठक में आपने शायद कहा है कि विधेयक को सितंबर के प्रथम सप्ताह में लिया जाए। मैं विश्वास करता हूँ, कि वह आपका सुझाव मात्र था। वह आपका निर्णय नहीं था।

ससम्मान आपका

ह./- बी. आर. अम्बेडकर