108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मैंने इन्हें उसी दिन लिखा था।
10 अगस्त, 1951
प्रिय अम्बेडकर,
मैंने कल आपको हिंदू संहिता विधेयक के बारे में लिखा था। आपका पत्र आज दिनांक 10 अगस्त का मिला।
मुझे खेद है कि आपका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है और आप चिंत्ति हैं। मैं आपको सुझाव दूंगा कि आप जीवन को थोड़ा सहज रूप में लें।
जहाँ तक हिंदू संहिता विधेयक का संबंध है, आपको इस बात की जानकारी है कि इसका बहुत अधिक विरोध किया जा रहा है, सदन के अंदर ही नहीं, बाहर भी। हम विश्व में प्रबल इच्छाशक्ति के साथ भी विरोधी पक्ष के विचारों की उपेक्षा नहीं कर सकते और इसको जल्दी पास नहीं करवा सकते, वे इसमें विलंब करवाने में समर्थ हैं। इसलिए हमें किसी तरीके से आगे बढ़ना चाहिए तभी हम किसी नतीजे पर पहुॅंच सकते हैं। मैं चाहता हूँ कि यह विधेयक इस सत्र में पास हो जाना चाहिए।
मंत्रिमंडल ने निर्णय किया था और मेरे विचार में कार्यवाही सारांश में से रिकार्ड भी किया गया था कि सितंबर के आरंभ में विधेयक को लिया जाए। मैंने इस बात का उल्लेख पार्टी की बैठक में किया था और उन्होंने स्वीकार भी कर लिया था। यदि हम जल्दबाजी करने का प्रयास करेंगे और इस विधेयक को जल्दी लाएंगे तो इससे हमारे विरोधियों को व्यर्थ का बहाना मिल जाएगा और वे हमारे लिए परेशानी खड़ी करेंगे। वैसे भी कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों-अध्यादेशों, भाग ‘ग’ राज्य विधेयक, उद्योग विधेयक से निपटने के बाद सितंबर के प्रथम सप्ताह में इस विधेयक को लेना अधिक उपयोगी रहेगा। यदि हम इनमें से किसी से भी पहले हिंदू संहिता विधेयक को लेने का प्रयत्न करते हैं तो इससे बहुत शोर मचेगा और अन्य लोगों को व्यर्थ में बहाना मिल जाएगा। मेरे विचार में, सब बातों को ध्यान में रखते हुए बेहतर यही होगा कि हम घोषित तिथियों के अनुसार ही कार्यवाही करें। इससे हम अधिक शक्ति के साथ इस कार्य का निष्पादन कर पाएंगे और हमें कम-कम विरोध का सामना करना पड़ेगा। संसद की बैठक कम से कम अक्तूबर के पहले सप्ताह तक चलेगी। अतः पर्याप्त समय उपलब्ध है।
आपका
ह./
जवाहर लाल नेहरू
27 सितंबर को मुझे निम्नलिखित त्याग-पत्र प्राप्त हुआ।