43. डॉ. अम्बेडकर का त्याग पत्र - Page 126

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‘‘मैं काफी समय से मंत्रिमंडल से त्याग-पत्र देने के बारे में सोच रहा था। केवल एक ही बात मुझे अपने त्याग-पत्र देने से रोके हुई थी, मुझे आशा थी कि शायद इस संसद की कालावधि समाप्त होने से पूर्व मैं हिंदू संहिता विधेयक को प्रभावी बना सकूँ। मैं इस बात पर भी सहमत हो गया था कि विधेयक के दो भाग कर दिए जाएँ और हम इसको विवाह और तलाक तक सीमित रखें मुझे आशा थी कि कम से कम हमारी मेहनत सफल हो जाये। किंतु विधेयक का इतना भाग भी समाप्त हो गया अब मुझे आपके मंत्रिमंडल का सदस्य बने रहने का कोई प्रयोजन नज़र नहीं आता।

मैं चाहता हूँ, कि मेरा त्याग-पत्र तुरंत प्रभावी माना जाए। आपको मेरा त्याग-पत्र स्वीकार करने में संभवतः एक कठिनाई आ सकती है और वह यह कि मेरे नाम पर कुछ विधेयक और प्रस्ताव हैं जो अभी निपटाए नहीं गए हैं। परन्तु मैं समझता हूँ कि इस संबंध में मेरी अनुपस्थिति महसूस नहीं होनी चाहिए क्योंकि आपके मंत्रिमंडल का कोई भी अन्य मंत्री उनका संचालन कर सकता है। फिर भी यदि आप चाहते हैं कि मेरा त्याग-पत्र स्वीकार किए जाने से पूर्व मैं ही उनका संचालन करूं। तो मैं उनके निष्पादन तक ठहरने के लिए तैयार हूँ, परंतु केवल तभी तक। क्योंकि मैं नहीं चाहता कि मैं आपके प्रति व मंत्रिमंडल के प्रति उचित शिष्टाचार का निर्वाह न करूं। उस स्थिति में, मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि मेरे नाम पर विधेयकों व प्रस्तावों को दूसरों पर प्राथमिकता दी जाए।’’

उसी तारीख को, अर्थात् 27 सितंबर को मैंने उसका निम्नलिखित उत्तर दिया ः

‘‘मुझे आपका दिनांक 27 सितंबर का पत्र मिला। दो दिन पूर्व समाचार-पत्रों में आपका त्याग-पत्र प्रकाशित हुआ था और मैं चकित रह गया था। सत्र के आरंभ में, आपने अपने स्वास्थ्य के खराब होने के बारे में मुझसे बात की थी और निःसंदेह मैं जानता हूँ कि आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है।

आपका स्वास्थ्य ठीक न हरने और मंत्रिमंडल से त्याग-पत्र देने की इच्छा के कारण, मैं आपको मंत्रिमंडल में बने रहने पर विवश नहीं कर सकता। आपने इन वर्षों में मंत्रिमंडल में हमारा सहयोगी बनकर हमारे साथ मिलकर इकट्ठे काम किया, मैं इसकी सराहना करता हूँ। हमारे बीच में कई बार मतभेद भी हुआ है किंतु उससे आपके द्वारा किये अच्छे काम की सराहना में कोई अंतर नहीं पड़ा बल्कि मुझे खेद है कि आप हमसे दूर हो जाएंगे।

आपको इस बात से हुई भारी निराशा को मैं भली-भांति समझता हूँ कि इस सत्र में हिंदू संहिता विधेयक पास नहीं हो सका और उसके विवाह तथा तलाक