111 डॉ. अंबेडकर का दिनांक 4 अक्तूबर का पत्र :-
‘‘मुझे आपका पत्र संख्या शून्य दिनांक 3 अक्तूबर, 1951 को मिला।’’
आपने कहा है कि मैं सत्र के अंतिम दिन सदन में अपना वक्तव्य दूँ। क्या इसका अर्थ यह है कि यदि 6 तारीख सत्र का अंतिम दिन न हो तो मुझे उस दिन अपना वक्तव्य नहीं देना चाहिए। मैं स्पष्ट रूप से जानना चाहता हूँ कि मुझे अपना वक्तव्य किस दिन देना है क्योंकि मुझे उपाध्यक्ष को भी सूचित करना है।
मैंने देखा कि आप भी मेरे वक्तव्य के बाद अपना वक्तव्य देना चाहते हैं। इस प्रकार का वक्तव्य देने की रूढि़ तो नहीं है जैसा कि आप देना चाहते है। सदन के कार्य के अनुसार जो भी आपका अधिकार है आप उसका उपयोग कर सकते हैं। मेरे वक्तव्य के बाद यदि आप कोई वक्तव्य देते हैं, तो उस पर निजी तौर पर मैं कोई आपत्ति नहीं करूंगा। जहाँ तक आपको मेरे वक्तव्य की अग्रिम प्रति दिए जाने संबंधी अनुरोध की बात है, जैसाकि आप जानते हैं, भाषण या वक्तव्य लिखकर रखने की मेरी आदत नहीं हैं। मैंने अपने वक्तव्य का पाठ अब तक नहीं लिखा है। यदि मुझे अपना वक्तव्य समय पर लिख सकने का अवसर मिला तो मुझे उसकी अग्रिम प्रति भेजकर प्रसन्नता होगी। मैं कितना पहले आपको अग्रिम प्रति भेज पाऊंगा, कह नहीं सकता। डॉ. अंबेडकर को लिखा गया दिनांक 4 अक्तूबर का मेरा पत्र :-
‘‘आपका पत्र दिनांक 4 अक्तूबर, मिला। अब मुझे स्पष्ट हो गया है कि सत्र कम से कम 11 अक्तूबर तक चलेगा। मैंने इस संबंध में सदन को भी सूचित कर दिया है। यदि आपके लिये उपयुक्त हो तो आप अपना वक्तव्य उस दिन दे सकते हैं।
जहाँ तक मेरा वक्तव्य दिए जाने का संबंध है, मैंने इस बारे में कोई पक्का निर्णय नहीं किया है। परंतु मैंने सोचा था कि शायद मैं इस अवसर पर कुछ शब्द कहूँ।’’ डॉ. अम्बेडकर का 4 अक्तूबर का ही पत्रः-
‘‘ जैसे कि आपने अपने पत्र संख्या 3373-पी. एम. दिनांक 4 अक्तूबर में सुझाव दिया है, मैं आपके प्रस्ताव से सहमत हूँ और मैं अपना वक्तव्य संसद में 11 अक्तूबर को दूंगा। मैंने उपाध्यक्ष महोदय से भी बात कर ली है और वह भी मेरे नाम में लिखे कार्य अर्थात् परिसीमन आदेश के निष्पादन के पश्चात् उस तारीख को मुझे वक्तव्य देने की अनुमति देने पर सहमत है।’’ महोदय यह अंतिम पत्र था।
* श्री कॉमथ : महोदय, आगे बढ़ने से पूर्व क्या आप मुझे यह पूछने की अनुमति
* संसदीय वाद-विवाद, जिल्द-16, भाग- II, 12 अक्तूबर, 1951, पृ. 4751-53