112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
देंगे कि क्या डॉ. अंबेडकर को, जो इस समय सदन में उपस्थित हैं, सूचित किया गया था कि प्रधानमंत्री और उनके बीच पत्राचार को सदन में पढ़ा जाएगा? यह संबंधित मंत्री के प्रति शिष्टाचार दिखाने की बात है कि उन्हें इस बात की सूचना दे दी जाती कि उनका पत्राचार सदन में पढ़ा जाने वाला है। यदि उनको सूचित नहीं किया गया था तो सदन जानना चाहती है कि ऐसा क्यों नहीं किया गया। मुझे इस बात की जानकारी नहीं है कि उनको सूचित किया गया था या नहीं। वह सदन को बताए कि उनको सूचित किया गया था या नहीं।
माननीय उपाध्यक्ष : इन सब बातों से मेरा कुछ लेना-देना नहीं है। जब सरकार
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का काई प्रवक्ता इस संबंध में कुछ कागजात को पढ़कर सुनाना चाहता है तो मैं सहज स्वभाव में उसकी अनुमति दे देता हूँ। इसके अतिरिक्त मैंने डॉ. अंबेडकर द्वारा अपना वक्तव्य दिखाए जाने हेतु 6 बजे का समय निर्धारित किया था। उस समय वह अपनी सीट पर बैठे नहीं थे। तत्पश्चात् उससे संबंधित ये सब बातें हुईं और पत्र पढ़े गए। यही अपेक्षित था, इसलिए कोई विशेष सूचना दिए जाने की आवश्यकता नहीं थी।
श्री कॉमथ : किंतु क्या पत्राचार के दूसरे पक्ष को सूचित किया गया था?
माननीय उपाध्यक्ष : यदि वह अनुपस्थित रहना पसंद करें तो क्या किया जा
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सकता है?
श्री कामथ : वह यह कहकर चेम्बर से बाहर चले गये थे कि उन्होंने त्याग-पत्र दे दिया है। क्या उनको भूतपूर्व मंत्री के रूप में वक्तव्य देने की अनुमति दी जाती? मेरे विचार में, उनको यह नहीं बताया गया था कि उनके पत्राचार को 6 बजे पढ़ा जाएगा।
माननीय उपाध्यक्ष : मंत्री की हैसियत से वक्तव्य नहीं दिया जाना था, पद पर
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रहते हुए नहीं, बल्कि त्याग-पत्र देने के बाद ही वक्तव्य दिया जाना था। समय कुछ भी हो, त्याग-पत्र देने के एक मिनट बाद ही वह भूतपूर्व मंत्री हो जाता है। फिर वह मंत्री नहीं रहता। नियमों के अनुसार, एक सदस्य, जिसने मंत्री का पद छोड़ दिया हो, अध्यक्ष के अनुमति से अपने त्याग-पत्र के स्पष्टीकरण के रूप में निजी वक्तव्य दे सकता है। जैसे ही उसने त्याग-पत्र दे दिया हो और प्रधानमंत्री द्वारा स्वीकार कर लिया गया हो, वे नियम कुछ भी हो मेरा उनसे कोई संबंध नहीं है, जब वह त्याग-पत्र दे देता है और वक्तव्य देना चाहता है तो वह मंत्री की हैसियत से वक्तव्य नहीं देता। उस समय वह भूतपूर्व मंत्री ही होता है। मैं इस तरह की आकस्मिक बातों की अनुमति नहीं दूंगा। यदि माननीय सदस्य कोई मामला उठाना चाहते हैं तो उन्हें या तो कक्ष में इसे मिलना चाहिए या पहले से मेरे साथ बात करनी चाहिए फिर इन मामलों का उल्लेख किया जाए। अब इस मामले को और आगे न बढ़ाया जाए।