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श्री कामथ : क्या मैं कृपया पुनः निवेदन कर सकता हूँ कि कल पत्राचार के पढ़े जाने से यह आश्चर्य सामने आया था। चूंकि डॉ. अंबेडकर आज उपस्थित हैं, क्या आप उनको कल पढ़े गए पत्राचार के संबंध में एक वक्तव्य देने की, यदि वह चाहें तो, अनुमति देंगे?
माननीय उपाध्यक्ष : मुझे इस बात की जानकारी है, माननीय सदस्य अपने हितों की रक्षा करने में स्वयं समर्थ है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूँ कि मैं यहाँ पर काल्पनिक कथनों का उत्तर नहीं दे सकता। इसलिए यदि माननीय सदस्य स्वयं ऐसा कुछ करना चाहते हैं, यदि वह स्वयं कोई वक्तव्य देना चाहते हैं अथवा ऐसा कुछ करना चाहते हैं तो मैं उस पर विचार करूंगा।
डॉ. अंबेडकर (बम्बई) : मैं आपकी अनुमति से केवल दो टिप्पणियाँ करना चाहता हूँ जब मैं चेंबर से बाहर निकला तो मुझे विश्वास था कि मैं सदन पर तथा आप पर ऐसा प्रभाव छोड़कर जा रहा हूँ कि मैं 6 बजे अपना वक्तव्य देने के लिए तैयार नहीं हूँ। मेरे विचार में, मैंने इस बात को स्पष्ट कर दिया था। अब मैं न तो बोलने का अवसर मांग रहा हूँ और नहीं यह कह रहा हूँ, कि प्रधानमंत्री द्वारा 6 बजे पत्राचार पढ़े जाने से मैं क्षुब्ध हूँं। यह पूरी तरह जानते हुए कि मैंने आज सुबह स्पष्ट रूप से कहा था कि मैं आपके द्वारा की गई टिप्पणियों को स्वीकार नहीं करने वाला कि मैं 6 बजे अपना वक्तव्य दूँ। यह बात मैं आप पर छोड़ता हूँ कि बिना मुझे पहले से यह सूचित किए कि वह पत्राचार पढ़ने जा रहे हैं, प्रधानमंत्री के लिए ऐसा करना उचित था या नहीं, मैं यह बात आप पर और प्रधानमंत्री पर छोड़ता हूँ क्योंकि मैं जानता हूँ, कि पत्राचार से यदि कोई गलत प्रभाव पड़े होंगे तो उनको ठीक करने के लिए अनेक अन्य साधन उपलब्ध हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य अपना मन बदलने के मामले में हमेशा स्वतंत्र हैं; परंतु मैंने 6 बजे का समय निश्चित किया था और 6 बजे का समय निश्चित रहेगा इसलिए मैं कह रहा था कि माननीय सदस्य 6 बजे अपनी सीट पर नहीं थे।
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[ मंत्रिमंडल से अपने त्याग-पत्र के स्पष्टीकरण के रूप में डॉ. अंबेडकर का वक्तव्य समाचार-पत्र
को तथा संसद सदस्यों के बीच वितरित किया गया था। जो इस शृंखला (सीरीज) में खंड 14
के भाग 2 में अनुबंध-1 के रूप में सम्मिलित किया गया है-संपादक ]