26. निर्वाचक नामावलियाँ - Page 134

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हैं? क्या अंग्रेजी में निर्वाचन नामावलियों को प्रकाशित करने के लिए यही निर्देश दिए गए थे?

डॉ. अम्बेडकर : मैं इन प्रश्न का कोई निश्चित उत्तर नहीं दे सकता। परन्तु मैं समझता हूँ कि निर्वाचन आयुक्त को इस शिकायत के मिलने पर ही कि बंबई में बहुत से ऐसे लोग हैं जो हिन्दी में प्रकाशित मतदाता सूचियों को समझ पाने में असमर्थ हैं, ये निर्देश दिए गए थे।

श्री सोनवाने : क्या यह निर्देश नहीं दिया जा सकता था कि जिससे इन निर्वाचक नामावलियों के प्रकाशन पर होने वाला छह लाख रुपये के अतिरिक्त खर्च को बचाया जा सकता था?

डॉ. अम्बेडकर : यह पूर्ण रूप से संभव है। मैं समझता हूँ कि कुछ भी असंभव नहीं है।

श्री सोनवाने : मैं पूछना चाहता हूँ धन की इस बर्बादी के लिए कौन जिम्मेदार है?

डॉ. अम्बेडकर : धन की कोई बर्बादी नहीं हुई है। जब अंग्रेजी में निर्वाचक नामवलियों का प्रकाशित करना आवश्यक ही था तो फिर इन्हें एक साथ प्रकाशित किया जा सकता था, पहले या बाद में भी किया जा सकता था।

श्री सोनवाने : लेकिन क्या निर्वाचक नामावलियों का देवनागरी और अंग्रेजी में साथ-साथ प्रकाशित करने से खर्च में कमी नहीं की जा सकती थी?

डॉ. अम्बेडकर : जी, नहीं। यह कैसे हो सकता था।

श्री कॉमथ : क्या बंबई तथा अन्य राज्यों से ऐसी रिपोर्ट प्राप्त हुई हैं कि पहले से प्रकाशित निर्वाचक नामावलियों के संबंध में अनेक दावे-एतराज दर्ज कराए गए हैं तथा इन दावों तथा एतराजों में से कितनों का निपटारा कर दिया गया है?

डॉ. अम्बेडकर : महोदय, यह बात इस से उत्पन्न नहीं होती।

माननीय उपाध्यक्ष : हाँ, ऐसा ही है।

श्री सारंगधर दास : इस बात को ध्यान में रखते हुए कि बिहार का सिंहभूम जिला द्विभाषी क्षेत्र है, क्या विधि मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि वहाँ पर निर्वाचक नामवलियों को हिन्दी में प्रकाशित करने के साथ ही उडि़या भाषा में क्यों प्रकाशित नहीं किया गया?

डॉ. अम्बेडकर : हो सकता है, उडि़या उस क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा न हो।

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