42. पिछड़े वर्गों के लिए केन्द्रीय अनुदान - Page 162

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डॉ. अम्बेडकर : राज्यों को धनराशि प्रदान नहीं की जाती है। आवेदन-पत्रों को निपटाने का कार्य एक केन्द्रीय बोर्ड करता है और इसमें राज्यों का किसी भी प्रकार का कोई दखल नहीं है।

ठाकुर कृष्ण सिंह : क्या मैं जान सकता हूँ कि विलय हुए राज्यों तथा भाग ख और भाग ग राज्यों में संबंधित राज्य सरकारों ने पिछड़े वर्गों की कोई सूचियाँ तैयार की हैं और क्या यह सही है कि इन राज्यों के विद्यार्थियों द्वारा छात्रवृŸा के लिए दिए गए आवेदन-पत्रों पर इसलिए विचार नहीं किया जाता क्योंकि वहाँ पर ऐसी कोई सूची ही उपलब्ध नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : इस प्रकार की सूचियाँ उपलब्ध हैं जिन्हें विभिन्न राज्यों द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया है।

श्री आर. के. चौधरी : क्या मैं जान सकता हूँ कि पिछड़े वर्गों की सूची को अंतिम बार कब पुनरीक्षित किया गया था?

डॉ. अम्बेडकर : इसके लिए मुझे नोटिस दिया जाना चाहिए।

डॉ. देशमुख : क्या इन पिछड़े वर्गों की राज्यवार जनसंख्या का पता लगाने के लिए कोई प्रयास किया गया है।

डॉ. अम्बेडकर : इस समय जनसंख्या की बात करना बिल्कुल महŸवहीन है।

डॉ. देशमुख : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यह सच नहीं है कि प्रत्येक राज्य की अनुसूची मे शामिल पिछड़े वर्गों की संख्या में बहुत अधिक अन्तर है और यह कि भाग ‘ग’ राज्यों में शामिल वर्गों की संख्या बहुत कम है?

डॉ. अम्बेडकर : इस बात की पूरी संभावना है, क्योंकि एक क्षेत्र में जो समुदाय पिछड़े वर्ग में शामिल है, हो सकता है दूसरे क्षेत्र में वह उसमें शामिल न हो।

डॉ. देशमुख : क्या यह सच नहीं है कि भाग ‘ग’ के राज्य देश के अन्य भागों की तुलना में अधिक पिछड़े हुए हैं।

डॉ. अम्बेडकर : संभवतः यह एक लांछन है जिसे लगवाना वे पसन्द नहीं करेंगे।

ठाकुर कृष्ण सिंह : क्या यह सच नहीं है कि संघ बनने और प्रान्तों के राज्यों में विलय होने से पूर्व पुनरीक्षित सूची तैयार की गई थी?

डॉ. अम्बेडकर : ऐसा हो सकता है, लेकिन इससे मुद्दे पर क्या प्रभाव पड़ता है? ये सूचियाँ पक्की नहीं हैं। इन्हें हर बार पुनरीक्षित किया जाता है।

श्री देशबंधु गुप्ता : क्या यह सच नहीं है कि इन छात्रवृŸायों को प्रदान करने से पूर्व विभिन्न राज्यों की जनसंख्या के आधार पर धनराशि का आवंटन किया जाता है और छात्रवष्िŸायों का संवितरण भी राज्यों के माध्यम से ही किया जाता है?

डॉ. अम्बेडकर : जहाँ तक मैं समझता हूँ, बात ऐसी नहीं है।