43. राष्ट्र भाषा के उन्नयन के लिए अनुदान - Page 164

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श्री केशव राव : प्रश्न के भाग ‘ख’ में माननीय मंत्री महोदय ने जिन कुछेक संगठनों के नाम लिए वे या तो इलाहाबाद में स्थित हैं अथवा दिल्ली में। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या हिन्दीतर क्षेत्रों में स्थित कोई संगठन हैं जिन्हें केन्द्र सरकार द्वारा कोई सहायता राशि दी जाती हो?

डॉ. अम्बेडकर : उपर्युक्त स्थानों के अलावा किसी और संगठन की मुझे कोई जानकारी नहीं है और यदि कहीं कोई संगठन है भी तो शायद वह इस प्रकार के कार्य को करने में समर्थ नहीं है।

श्री केशव राव : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या सरकार को हिंदीतर क्षेत्रों द्वारा अपने क्षेत्रों में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए किए गए अतिरिक्त खर्च के बारे में कोई जानकारी है?

डॉ. अम्बेडकर : वे संभवतः ऐसा ही कर रहे होंगे। जो राज्य सरकारें इस संबंध में काफी उत्साही हैं वे ज्यादा धन खर्च करती हैं और जिन राज्य सरकारों में इस संबंध में कम उत्साह है वे कम पैसा खर्च करती हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि सरकार संस्थाओं को खोलने, उन्हें मान्यता प्रदान करने और हिन्दीतर क्षेत्रों के लिए भी एक केन्द्रीय संस्थान की आवश्यकता पर विचार कर रही है।

श्री आर. के. चौधरी : क्या गैर हिंदीतर क्षेत्रों को वितरित करने के लिए निर्धारित किए धन का पहले ही वितरण कर दिया गया है? और यदि हाँ, तो असम को कितनी धनराशि आवंटित की गई है?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे मालूम नहीं है कि ऐसा किया गया है। मैं इस विषय पर अब कोई जानकारी नहीं दे सकता।

श्री ए. सी. गुहा : इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि माननीय मंत्री ने सहायता प्राप्त कर रहे जिन चार संस्थानों के नाम गिनाए हैं वे या तो इलाहाबाद में स्थित है अथवा दिल्ली में स्थित हैं, मैं यह जानना चाहता हूँ कि उनके कार्यकलाप क्या-क्या है और उन्हें धनराशि देने के पीछे क्या प्रयोजन है?

डॉ. अम्बेडकर : क्योंकि हम हिंदी का प्रचार प्रसार करना चाहते हैं और इन संस्थाओं की शाखाएं पूरे देश में फैली हुई हैं।

श्री ए. सी. गुहा : क्या उनकी शाखाएं पूरे देश में हैं?

डॉ. अम्बेडकर : कोई भी इस बात का पता लगा सकता है कि इनकी शाखाएं पूरे देश में हैं वरना उन्हें इमदाद नहीं दी जाती।