43. राष्ट्र भाषा के उन्नयन के लिए अनुदान - Page 165

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री शिवचरण लाल : हिन्दी साहित्य सम्मेलन को वर्ष 1949-50 और 1950-51 के दौरान कितनी धनराशि प्रदान की गई?

डॉ. अम्बेडकर : क्योंकि हिन्दी का बहुत ज्यादा प्रसार-प्रचार हुआ है।

सेठ गोविन्द दास : हिन्दी साहित्य सम्मेलन और जामिया मिलिया को कितनी-कितनी धनराशि का आवंटन किया गया है ?

डॉ. अम्बेडकर : जैसा कि मैं कह चुका हूँ, मेरे पास जो आंकड़े उपलब्ध हैं उनके आधार पर मैं कोई तुलना नहीं कर सकता। कुल धनराशि का ब्यौरा में दे चुका हूँ।

सेठ गोविन्द दास : क्या सरकार के पास हिंदी का प्रचार-प्रसार करने में लगे अनुदान प्राप्त करने वाले संस्थानों और संगठनों के कार्यकलापों से संबंधित कोई जानकारी है; और क्या सरकार को इस संबंध में कोई वार्षिक, छमाही अथवा तिमाही रिपोर्ट प्राप्त होती है?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे लगता है कि मेरे माननीय मित्र यह मान रहे हैं कि धनराशि प्रदान करने से पूर्व सरकार को इस बारे में सूचना होनी चाहिए।

श्री केशवराव : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या किन्हीं हिन्दीतर राज्यों ने अपने राज्यों में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए अनुदान की मांग की है?

डॉ. अम्बेडकर : मैं समझता हूँ कि प्रत्येक राज्य सरकार को अनुदान मांगने की आदत होती है।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय मंत्री उŸार देते जा रहे हैं, माननीय सदस्य खुद ही उनसे निष्कर्ष निकाल सकते हैं। वह स्पष्टतः विस्तष्त उŸार देने की स्थिति में नहीं हैं। सदस्य संबंधित मंत्री महोदय के सदन में आने तक अपने प्रश्नों को रोक कर रख सकते हैं। काल्पनिक सवालों के काल्पनिक उŸार प्राप्त करने का कोई लाभ नहीं है।

सेठ गोविन्द दास : मैं विवरण नहीं माँग रहा हूँ बल्कि मैं तो सैद्धांतिक प्रश्न पूछ रहा हूँ। क्या सरकार ने हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए कोई निश्चित योजना बनाई है अथवा ऐसी कोई योजना बना रही है अथवा ऐसी कोई योजना ही नहीं है?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे इस प्रश्न को माननीय शिक्षा मंत्री द्वारा उŸार दिए जाने के लिए छोड़ देना चाहिए।

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