160 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री कॉमथ : क्या उनके अभ्यावेदन विचाराधीन हैं?
डॉ. अम्बेडकर : हम उन पर विचार कर रहे हैं परन्तु यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि हम उन्हें कोई राहत दे सकते हैं या नहीं।
श्री कॉमथ : महोदय, निर्वाचक नामावलियों को अंतिम रूप से कब तक प्रकाशित कर दिया जाएगा?
डॉ. अम्बेडकर : मैं समझता हूँ, बहुत जल्दी ही प्रकाशित होंगी, परन्तु कोई निश्चित तारीख नहीं बताई जा सकती।
श्री कॉमथ : क्या अभी तक कोई तारीख भी निश्चित नहीं की गई?
डॉ. अम्बेडकर : निश्चित रूप से बहुत शीघ्र प्रकाशित होंगी।
श्रीमती रेणुका रे : क्या सरकार राजस्थान में मताधिकार से वंचित की गई महिलाओं को राहत पहुंचाने के लिए कोई कदम उठाएगी?
डॉ. अम्बेडकर : राहत देने का सवाल वास्तव में इस बात पर निर्भर करता है कि हम निर्वाचक नामावलियों से इन महिलाओं के नाम हटा सकते हैं, आपिŸायाँ दर्ज करने और उन की आपिŸायों को निपटाने के लिए पर्याप्त समय दे सकते हैं ताकि चुनाव की तारीख से पहले ही निर्वाचक नामावलियों के इस कार्य को अंतिम रूप दिया जा सके। ये सभी कार्य एक साथ विचारधीन हैं।
श्रीमती रेणुका रे : इस बात को ध्यान में रखते हुए कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है और नामों को दर्ज करने वालों को सही ढंग से प्रशिक्षित नहीं किया गया था, क्या सरकार, यह देखने के लिए कि क्या इस गलती को सुधारा जा सकता है और उन महिलाओं के नाम मतदाता के रूप में शामिल किए जा सकते हैं, कोई कदम उठाना आवश्यक नहीं समझती?
डॉ. अम्बेडकर : हम यहाँ किसी का दोष ढूंढ़ने के लिए बहस नहीं कर रहे हैं बल्कि हम वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए बहस कर रहे हैं।
श्री आर. सी. उपाध्याय : क्या यह सच है कि प्रधानमंत्री ने राजस्थान की महिलाओं के प्रतिनिधि मण्डल को यह आश्वासन दिया है कि इस बारे में कुछ न कुछ किया जाएगा?
डॉ. अम्बेडकर : इस संबंध में मुझे पक्का विश्वास है कि प्रधान मंत्री महोदय ने कानून के अनुसार ही आश्वासन दिया होगा।
श्री कॉमथ : महोदय, क्या निर्वाचन आयेग को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ राज्यों के कुछ क्षेत्रों में यहाँ तक कि मृत व्यक्तियों के नाम भी प्रारंभिक नामावलियों