50. निर्वाचक नामावलियों पर आपत्तियां - Page 179

162 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कम का समय नहीं लगने वाला और इसका सीधा अर्थ है कि चुनाव आगे स्थगित करने होंगे।

श्री आर. सी. उपाध्याय : क्या सरकार निर्वाचक नामावलियों में श्रीमती अमुक-अमुक के लिए उचित विधान द्वारा संशोधन नहीं कर सकती?

विŸा राज्य मंत्री (श्री त्यागी) : पतियों के नामों में संशोधन नहीं किया जा

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सकता।

श्री आर. सी. उपाध्याय : पतियों के नामों में नहीं लेकिन........

डॉ. अम्बेडकर : पंजीकरण की प्रक्रिया कानून द्वारा निर्धारित की गई है और उस प्रक्रिया का पालन किया ही जाना चाहिए।

श्री आर. सी. उपाध्याय : क्या इसे परिवर्तित नहीं किया जा सकता?

डॉ. अम्बेडकर : ठीक है, कानून को बदला जा सकता है- परन्तु यह संसद के हाथ में है। मैं यह नहीं बता सकता कि यदि इसे संसद के समक्ष रखा गया तो इसके संशोधन में कितना समय लगेगा। कोई माननीय सदस्य : पांच मिनट।

श्रीमती रेणुका रे : यदि कानून बदला जाता है तो इन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जा सकता है। निश्चय ही, यही एक संभव रास्ता है। अतः क्या सरकार संसद के समक्ष बिल रखने पर विचार कर रही है?

डॉ. अम्बेडकर : मुझे ऐसा लगता है कि मेरे लिए किसी ऐसे प्रस्ताव को ग्रहण करना कठिन है कि महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कानून होने चाहिए।

माननीय उपाध्यक्ष : अब हम इस मुद्दे पर बहस नहीं करेंगे। अगला प्रश्न।

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