174 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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1074 श्री सिवन पिल्लै : स्वास्थ्य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :
(क) क्या सरकार को कुष्ठ रोग से पीडि़त रोगियों की सही-सही राज्यवार आंकड़ों की संख्या की जानकारी है;
(ख) यदि हाँ, तो देश के कौन से राज्य में जनसंख्या के अनुसार कुष्ठ रोगियों की संख्या सबसे अधिक है; और
(ग) इस भयानक रोग का सामना करने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) और (ख) : जैसे कि पहले भी प्रायः कहा जाता रहा है इस बारे में सही-सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
(ग) यह मामला मुख्य रूप से, राज्य सरकार से संबंधित है। भारत सरकार ने कुछ समय पूर्व देश में केन्द्रीय कुष्ठ रोग शिक्षण और अनुसंधान संस्थान स्थापित करने की योजना बनाई थी जिसका उद्देश्य कुष्ठ रोग संबंधी समस्याओं पर अनुसंधान करना, अनुसंधान के परिणामों के कार्यान्वयन हेतु क्षेत्र में जाकर अध्ययन को बढ़ावा देना, कुष्ठ-विरोधी तकनीकी सलाह और मार्ग निर्देशन करना तथा राज्यों में कुष्ठ रोग संस्थाओं के संगठन और उनके विकास में सक्रिय रूप से भागीदारी करना था। केवल विŸाय परेशानी के कारण यह योजना अधूरी रह गई। परन्तु कुछ स्वयंसेवी संस्थाएँ और कुछेक राज्य कुष्ठ रोगियों के बीच जाकर अच्छा कार्य कर रहे हैं तथा अनुसंधान कार्य भी चल रहा है।
श्री सिवन पिल्लै : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि गांधी स्मारक निधि द्वारा केन्द्रीय कुष्ठ रोग राहत समिति बनाई गई है। इस महारोग को समाप्त करने के लिए सरकार का प्रस्ताव किस प्रकार सहयोग करने का है?
डॉ. अम्बेडकर : सरकार उन सभी कार्यों को करने को बाध्य हैं जो वह कर सकती है।
श्री सिवन पिल्लै : मैं जानना चाहता हूँ कि क्या कोई ऐसा राज्य है जहाँ एक भी कुष्ठ रोग निदानगृह नहीं है? और यदि हाँ, तो वह राज्य कौन-सा हैं?
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे विश्वास है कि अनेक राज्य ऐसे हैं जहाँ
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एक भी कुष्ठ रोग निदानगृह नहीं है।
* संसदीय वाद-विवाद, खंड-9, भाग- I, 17 सितम्बर, 1951, पृ. 1378