178 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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1093 श्री कॉमथ : क्या स्वास्थ्य मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि :-
(क) इपेकाकुनहा पौधों को भारत में उगाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और इस समय उठाए जा रहे हैं जिसकी जड़ों से इमेटाइन प्राप्त होता है और वह अमीबा रक्तविकार की विशिष्ट औषधि है?
(ख) भारत में अमीबा रक्तविकार के कितने मामले प्रकाश में आए हैं;
(ग) प्रतिवर्ष कितनी मात्रा में कितने मूल्य का इमेटाइन और इपेकाकुन मूल को किन-किन देशों से आयात किया जाता है;
(घ) क्या यह सच है कि सिनकोना निदेशालय द्वारा पश्चिम बंगाल में इपेकाकुन पौधों को उगाए जाने की दिशा में कोई कार्य किया गया है; यदि हाँ, तो इसके क्या परिणाम निकले हैं; और
(ड.) क्या इस समय पश्चिम बंगाल में उगाए जा रहे इपेकाकुन पौधों को अन्य स्थानों पर भी उगाए जाने का प्रस्ताव है? और यदि हाँ, तो क्या कदम उठाए जाने का विचार है?
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : (क) समझा जाता है कि भारत में इसे उगाने में अब
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तक जो कठिनाई महसूस की गई है वह इसके वाणिज्यिक स्तर को लेकर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद प्रायोगिक स्तर पर इपेकाकुनहा को उगाने का कार्य कर रही है और इसे कोयम्बतूर, पंचगनी और दार्जिलिंग में की जा रही औषधीय पौधों की खेती के लिए परिषद द्वारा तैयार की गई समन्वित योजना में शामिल किया गया है;
(ख) माना जाता है कि अमीबा रक्तविकार की घटनाएँ भारत के पूर्वी और दक्षिणी भागों अर्थात् मद्रास और पश्चिम बंगाल में बहुत ज्यादा होती हैं। इस रोग के सूचनीय न होने से इसके आंकड़े नहीं रखे जाते हैं।
(ग) इमेटाइन हाइड्रोक्लोराइड और इपेकाकुन मूल के आयात किए जाने संबंधी आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं;
(घ) और (ड.) पश्चिम बंगाल सरकार से सूचना मंगवाई गई है और यथा समय सदन के पटल पर रख दी जाएगी।
* संसदीय वाद-विवाद, खंड-9, भाग- I, 17 सितम्बर, 1951, पृ. 1405