186 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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राजस्थान की महिला मतदातओं के संबंध में जयपुर की
महिला समिति की याचिका
1266 श्रीमती दुर्गागाई (श्रीमती रेणुका रे के स्थान पर) : (क) विधि मंत्री 27
अगस्त, 1951 के तारांकित प्रश्न संख्या 534 के बारे में पूछे गए पूरक प्रश्नों के बारे में यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या मतदाता सूचियों में महिला मतदाताओं के नाम काटने के कारण मतदाता सूचियों को तैयार करने वाले कर्मचारियों द्वारा प्रारंभ में ही सही नाम दर्ज न करना था?
(ख) क्या यह सच है कि इन अधिकारियों को संबंधित महिलाओं के नामों को सही ढंग से लिखने के अनुदेश नहीं दिए गए थे जिसके परिणामस्वरूप उनके नाम निर्वाचक नामावलियों में शामिल नहीं किए गए? माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री) : (क) नहीं श्रीमान। जिन अधिकारियों ने
प्रारंभिक रूप से इन मतदाता सूचियों को तैयार किया था वे कुछ राज्यों में महिला मतदाताओं के वास्तविक नामों को जानने में असमर्थ रहे हैं। मैं समझता हूँ कि इसका कारण महिलाओं तथा उनके रिश्तेदारों द्वारा उन महिलाओं के नामों को बताने में संकोच करना है।
(ख) निर्वाचन आयोग ने राज्य सरकारों को विशेष रूप से यह अनुदेश दिए थे कि महिलाओं के सही नाम लिखें जाए और ‘अमुक की पत्नी’ अथवा ‘अमुक का पुत्री’ न लिखा जाए। राज्य सरकारों को यह भी अनुदेश दिए गए थे कि वे जिन महिलाओं के नाम मतदातासूचियों में वास्तविक सही नामों से दर्ज नहीं किए गए थे उन महिला मतदाताओं के सही नामों का सरकारी एजेंसी के माध्यम से पता लगाने के लिए भरसक सरकारी प्रयास किए जाएं। इस कार्य में जनता का सहयोग भी मांगा गया था। यह सही अनुदेशों के अभाव के कारण नहीं था कि सूचियों में नामों की विहित रीति से दर्ज नहीं किया जा सकता था।
श्रीमती दुर्गाबाई : महोदय, यह आप एक या दो पूरक प्रश्न पूछने की अनुमति देने की कृपा करेंगे?
माननीय उपाध्यक्ष : नहीं, यह प्रश्न काल नहीं है।
श्री सोधी : और माननीय सदस्य स्वयं नियमों को जानती हैं।
* संसदीय वाद-विवाद, खंड-9, भाग- I, 25 सितम्बर, 1951, पृ. 1666