35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 21

4 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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दोहपर 12 बजे

इस विधेयक को लाने का दूसरा कारण यह है कि अनेक सदस्यों ने 26 जनवरी, 1950 (जब संविधान प्रवृत्त हुआ था) के पश्चात् अपना पद ग्रहण किया था और उन्हें, उनके इस निवेदन के अनुसार इस बात की जानकारी नहीं थी या इस बारे में वे सजग नहीं थे कि संविधान में इस प्रकार का प्रावधान किया गया है। उनके निवेदनों के अनुसार यह गलतफहमी का मामला था। वे यह नहीं समझ पाए कि वास्तव में क्या हो रहा है और मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यद्यपि विधि का यह साधारण नियम है कि विधि की अज्ञानता कोई बहाना नहीं होती; इस प्रकार के मामले में हमें सदस्यों के इस निवेदन को सद्भावपूर्वक स्वीकार करना चाहिए कि उन्हें वास्तव में इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे इस प्रकार की निर्योग्यता के अंतर्गत आ रहे हैं। यदि माननीय सदस्य उन व्यक्तियों और पदों के प्रवर्गों का विश्लेषण करते जिनका विधेयक में उल्लेख किया गया है तो वे यह मानेंगे कि वे सदस्य जिन्हें यह संरक्षण दिया गया है इन दो-प्रवर्गों में से एक के अंतर्गत आते हैं। एक प्रवर्ग उन व्यक्तियों का है जो संविधान के विद्यमान होने से बहुत पहले से पद धारण किए हुए थे और दूसरा प्रवर्ग उन व्यक्तियों का है जो इस सद्भावपूर्ण रीति में विश्वास करते थे कि वे संविधान के अनुच्छेद 102 के अधीन किसी निरर्हता के अंतर्गत नहीं आते। इसी आधार पर यह विधेयक विरचित किया गया है।

मैं सदन को उन सिद्धांतों के बारे में भी जानकारी देना चाहता हूँ कि जिन पर सरकार जहाँ तक इस विधेयक का संबंध है और जहाँ तक लाभ के पद से उत्पन्न होने वाली निरर्हता के सिद्धांत का संबंध है कार्यवाही कर रही है। सरकार यह मत अपनाती है कि ब्रिटिश विधि के तकनीकी नियम को लागू करना वांछनीय नहीं है, अर्थात् यह कि यदि विधि यह घोषित करती है कि पद लाभ का पद है तो इस प्रश्न के बावजूद कि क्या सदस्य उस पद से संबद्ध वेतन लेता है या नहीं उसे निरर्हित घोषित किया जाना चाहिए। यह ब्रिटिश संविधान के अधीन नियम है; कतिपय पद विधि द्वारा लाभ के पद घोषित किए गए हैं। संसद के कुछ सदस्य ऐसे हो सकते हैं जो उस विशेष पद को स्वीकार कर लें और साथ ही उस पद के लाभ लेने से इनकार कर दें किंतु यह तथ्य कि उसने पद के लाभ लेने से इनकार कर दिया है, लाभ के पद के नियम से उसे नहीं बचाता है। सरकार यह सोचती है कि वह नितांत अवांछनीय बात है, क्योंकि यह कोरी तकनीकी बात है, हमें उसे अंगीकृत करने की आवश्यकता नहीं है। लाभ का पद क्या है, इसको परिभाषित करने के लिए सरकार ने जो कुछ किया है वह बहुत ही सरल बात है। उन्होंने इस बात को अवधारित करने के लिए कि क्या कोई विशिष्ट पद लाभ का पद है आधार निश्चित किए हैं। हाल