35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 22

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ही में वित्त विभाग ने अनेक समितियों में कार्य करने के लिए गैर-सदस्यों (अर्थात् ऐसे व्यक्ति जो संसद सदस्य नहीं है) को भुगतान करने के लिए नियम बनाए हैं। मैं यह नहीं जानता कि माननीय सदस्यों को इसकी जानकारी है या नहीं अथवा उन्होंने वित्त विभाग द्वारा प्रकाशित अधिसूचना देखी है या नहीं?

श्री सिधवा (मध्य प्रदेश) : हमें जानकारी नहीं है।

श्री सोंधी (पंजाब) : यह परिचालित नहीं की गई है।

डॉ. अम्बेडकर : ठीक है, मैं सोचता हूँ कि वे इसे प्राप्त कर सकते हैं। फिर भी यह बहुत आसान बात है। वे भत्ते जो वित्त विभाग की अधिसूचना (अथवा कार्यालय ज्ञापन जैसा वे कहते हैं) के अधीन उन सदस्यों के लिए संदेय हैं, जो समितियों में या अन्य पदों पर कार्य कर रहे हैं और संसद सदस्य नहीं है, इस प्रकार हैं :-

यात्रा भत्ता 1 ½ रेल किराये की दर से दिया जाता है यदि वह रेलवे यात्रा करता है और 1¼ किराया यदि वह हवाई जहाज से यात्रा करता है।

दिल्ली में 12-8-0 रुपए प्रतिदिन कलकत्ता और बंबई में 15/- रुपए प्रतिदिन अधिकतम 20/- रुपए प्रतिदिन की दर से दैनिक भत्ता दिया जाता है।

अब यदि कोई संसद सदस्य समिति में नियुक्त किया जाता है और यदि उसे कार्यालय ज्ञापन में जो कुछ विहित किया गया है, जिसे मैंने अभी संक्षिप्त रूप में सदन को बताया है, उससे अधिक संदत्त नहीं किया जाता तो उसे लाभ का पद धारण करने वाला सदस्य नहीं माना जाएगा। उसके लिए निरर्हता नहीं होगी क्योंकि उसे उस व्यक्ति के समकक्ष माना जाता है, जो संसद सदस्य नहीं है। किंतु यदि ऐसा कोई व्यक्ति, जो संसद सदस्य है और जिसे सरकार द्वारा किसी विशिष्ट समिति के लिए नियुक्त किया जाता है और वह उससे अधिक प्राप्त करता है जो वित्त विभाग के ज्ञापन में उल्लिखित है तो प्रश्न उत्पन्न होगा कि यह व्यक्ति लाभ का पद धारण करता है या नहीं।

श्री सोंधी : मान लीजिए वह और अधिक के लिए हकदार है किंतु उससे अधिक प्राप्त नहीं करता?

डॉ. अम्बेडकर : यह ऐसा मामला है कि जिसके बारे में मैं कल्पना करने में असमर्थ हूँ। जैसा कि मैंने कहा, स्थिति इस प्रकार है। यदि संसद सदस्य का, जिसे किसी समिति में नियुक्त किया जाता है, गैर-सदस्यों को देय दरों के रूप जो कुछ वित्त मंत्रालय ने नियम बनाया है उससे अधिक नहीं दिया जाता है तो निरर्हता का मामला बिल्कुल भी नहीं है। प्रत्येक सदस्य किसी भी समिति में नियुक्त किए जाने के लिए स्वतंत्र है जो सरकार ठीक समझे। किंतु यदि उससे अधिक संदत्त किया