वर्ष 1948-49 (न्याय प्रशासन) के लिए पूरक अनुदानों की माँग - Page 210

193

है कि मुझे अगली तारीख दे दी जाए और यदि सुनवाई के लिए तारीख नहीं बढ़ाई जाती तो वह अपना वकील इसलिए बदल देता है कि इस वकील के न्यायाधीश से अच्छे संबंध नहीं हैं जिसके अभाव में वह तारीख बढ़वाने में भी असमर्थ रहा है और कभी-कभी मुवक्किल अपने वकील से पूर्णतः असंतुष्ट हो जाता है और न्यायालय को इस बात पर विचार करना पड़ता है कि सुनवाई में होने वाले विलंब से बचने के लिए क्या उसकी अर्जी को नामंजूर किया जाए या नहीं। हमारी साधारण जनता भोली-भाली और अनजान होने के कारण निर्धारित तारीख को सभी वांछित वस्तुओं के साथ न्यायालय में हाजिर नहीं हो पाती है और उनकी सभी बातों के उचित होते हुए भी यदि उन्हें समय नहीं दिया जाए तो उन के पक्ष के कथन के उचित होते हुए भी मुकदमे में उनकी हार हो सकती है।

जहाँ तक प्रक्रियात्मक (प्रोसीजरल) कानून का संबंध है, इसमें होने वाले विलंब से बचने के लिए सभी तरीके और सभी आवश्यक नियम मौजूद हैं। यदि हमारे लोग हमारी जनता अपने मुकदमों की कार्यवाही को अधिक शीघ्रता से अधिक प्रभावपूर्ण ढंग से कराना चाहे और अपने गवाहों को बुलाने, पेश करने में ज्यादा चुस्त-दुरुस्त हो जाए तो मुकदमों की सुनवाई में होने वाले विलंब से काफी हद तक बचा जा सकता है।

डॉ. पी. एस. देशमुख : उच्च न्यायालयों में होने वाले विलंब का क्या कारण है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उच्च न्यायालयों में होने वाले विलंब का भी

vE csM dj

यही कारण है। शायद मेरे माननीय मित्र इस बात से, जिसे मैं जानता हूँ अनजान ही हैं कि हमारी अधिकांश जनता ज्योतिष में विश्वास करती है और जब उनसे यह कहा जाता है कि आपके मुकदमे की सुनवाई के लिए अमुक तारीख निर्धारित की गई है तो सबसे पहले वे यह जानने के लिए ज्योतिषी के पास पहुंचते हैं कि क्या यह दिन उनके लिए सौभाग्य कारक है अथवा नहीं। यदि उन्हें यह पता चलता है कि निर्धारित तारीख उनके लिए सौभाग्य कारक नहीं है तो वे दौड़कर बंबई जाते हैं और उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के कार्यालय से सम्पर्क स्थापित करते हैं और कभी-कभी तो क्लर्क को भारी रिश्वत भी देते हैं कि उनके मामले की सुनवाई के लिए कोई विशेष दिन निर्धारित कर दें। इस प्रकार के अनेक मामलों की मुझे जानकारी है। इसलिए हमने प्रक्रियात्मक (प्रोवीजन) कानून के संसबंध में विलंब से बचने का प्रयास किया है।

श्रीमती जी. दुर्गाबाई : क्या विलंब का कारण अभिलेखों के मुद्रण में लगने वाला अत्यधिक समय नहीं है?

माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं समझता हूँ कि जिस प्रकार प्रिवी कॉंसिल

vE csMd j