35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 23

6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जाता है, तब प्रश्न उत्पन्न होगा कि क्या ऐसा सदस्य लाभ का पद धारण कर रहा है या नहीं। ऐसे आपवादिक मामलों के बारे में सरकार की स्थिति इस प्रकार है कि वे कोई साधारण नियम अधिकथित नहीं करेंगे किन्तु वे प्रत्येक मामले पर पृथकतः विचार करेंगे, जब वह उत्पन्न होगा। सरकार नाम निर्देशन करते समय यह उल्लेख कर सकती है कि इस बात के होते हुए भी कि संदेय भत्ते वित्त मंत्रालय द्वारा तय की गई दरों से अधिक हैं, इससे सदस्य को कोई निर्योग्यता नहीं होगी। अथवा, ऐसे अनेक मामले होने पर, वे मामलों की साधारणतया जांच कर सकते हैं और इस प्रकार का विधेयक ला सकते हैं जैसा कि मैं लाया हूँ अर्थात् ऐसे कतिपय पदों को छूट देने के लिए जिनसे नियमाधीन निर्योग्यता उत्पन्न हो सकती है।

श्रीमान्, मैं यह सोचता हूँ कि मैंने सदन को वह समस्त जानकारी दे दी है जो उन कारणों को समझने के लिए आवश्यक है कि सरकार इस विधेयक को क्यों लाई है। मैं सोचता हूँ मैंने वे सभी आधारभूत सिद्धांत भी बता दिए हैं जो अनुच्छेद 102 से उत्पन्न होने वाले मामलों पर कार्यवाही करते समय सरकार के मस्तिष्क में थे।

माननीय उपाध्यक्ष : प्रस्ताव रखा गया :

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‘‘कि कतिपय लाभ के पदों के बारे में यह घोषित करने के लिए कि उनके धारण करने वाले संसद सदस्य होने के कारण, निरर्हित नहीं होंगे, विधेयक पर विचार किया जाए।’’

श्री सिधवा : महोदय, इस विधेयक का प्रस्ताव रखते समय माननीय मंत्री के

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भाषण माननीय सदस्यों के मन में से संदेह दूर नहीं हुआ है। बल्कि उनके भाषण के पश्चात्वर्ती भाग से संदेह बढ़ा है। उन्होंने कहा है कि यदि सदस्य ने उससे अधिक वेतन लिया है जो वित्त मंत्रालय ने तय किया है तो यह निरर्हता का मामला है। डॉ. अम्बेडकर के लिए भले ही यह प्रश्न गंभीर न हो। वह मंत्री है और उन्होंने किसी समिति में कार्य नहीं किया है। किंतु इस सदन के लगभग 50 प्रतिशत सदस्य समितियों में कार्य कर रहे हैं। उन्हें उनमें काम करने के लिए उस रूप में उत्प्रेरित नहीं किया गया था जैसा कि उन्होंने कहा है। उनसे उन समितियों में कार्य करने के लिए अनुरोध किया गया था। वे उनमें कार्य करने के लिए बाध्य थे। वे इस बारे में नहीं जानते थे कि इससे वे किसी निरर्हता के अंतर्गत आ जाएंगे। अतः इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है और मैं यह कहूँगा कि सरकार इस पर अधिक सहानुभूतिपूर्ण ढंग से विचार करे। मैंने संशोधन का नोटिस दिया है जो इस बारे में कोई संदेह नहीं छोड़ता। मैं चाहता हूँ कि वे सभी समितियाँ जिनमें सदस्यों को कार्य करने के लिए कहा गया था, इस विधेयक में सम्मिलित की जानी चाहिए। डॉ. अम्बेडकर ने अपना निजी मत प्रतिपादित किया है कि वे व्यक्ति जिन्होंने वित्त