204 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री टी. टी. कृष्णमाचारी : मैं जानकारी के लिये कुछ कहना चाहता हूँ। पहला पत्र दिनांक 12 सितम्बर, 1953, सभी राज्य सरकारों को संबोधित किया गया था और दूसरा पत्र दिनांक 20 अगस्त, 1954, जिसके साथ इस पत्र की प्रति संलग्न थी, सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के नाम से भेजा गया था न कि वाणिज्य मंत्रालय के संबद्ध विभागों को।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मुझे खेद है; संभवतः मुझ से गलती हुई होगी और अब सही बात का पता चल गया है। फिर भी मैं सरकार से अनुरोध करना चाहता हूँ कि मेरा तर्क बहुत ठोस है, प्रारंभ में प्रभारी मंत्री व राज्य सरकारों के बीच जो भी बातचीत हुई हो, सच यह है कि उनके संशोधन को कानून का रूप देने के लिये राज्यों द्वारा संकल्प पास करके सहमति दिया जाना आवश्यक है और यदि हमारे मित्र ने शिष्टाचार के नाते विचार-विमर्श करके राज्य सरकारों की शुभ इच्छा पहले से प्राप्त कर ली है तो राज्य सरकारों की बाद की कार्यवाही अर्थात् संकल्पों का पास किया जाना, केवल औपचारिकता की बात रह जाती है। परन्तु हो सकता है जो विचार-विमर्श मंत्री महोदय ने किया है, उससे वे संतुष्ट न हों तब उनके सामने बाधा
खड़ी हो सकती है जिसको, शायद वे दूर न कर सकें। मुझे इतना ही कहना है।
अब मैं इस बात पर आता हूँ कि सरकार संविधान के संशोधन हेतु किस तरीके से कार्यवाही करती है। मेरे विचार में, हमारा संविधान चार वर्ष पुराना है।
श्री बी. के. पी. सिन्हा (बिहार) : चार वर्ष और सात महीने।
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : ठीक है, अभी वयस्क नहीं हुआ है बच्चा भी नहीं है तथा चार वर्ष और सात महीने के अपने अस्त्तिव में उसमें तीन बार संशोधन हो चुका है, मेरे विचार में संविधान का यह तीसरा संशोधन है। मुझे विश्व के किसी भी ऐसे संविधान की जानकारी नहीं है जिसमें किसी सरकार ने इतनी जल्दी या मैं यह कहूँ कि अविवेक पूर्ण ढंग से संशोधन किए हों।
अब, महोदय मैं अपने तर्क को स्पष्ट करने के लिये संविधान में संशोधन करने के लिये अमरीका और आस्ट्रेलिया के संविधानों के उपबंध सदन के समक्ष रखना चाहता हूँ। बाद में, मैं बताऊंगा कि संविधान में संशोधन करने के मामले में हमारे संष्विधान और इन दो संविधानों में क्या अन्तर है। आस्ट्रेलिया के संविधान के अनुच्छेद 128 में यह उपबन्ध है कि संशोधनकारी विधान प्रत्येक सदन में पूर्ण बहुमत से दोनों सदनों द्वारा पास किया जायेगा। यह पहली शर्त है। दूसरे, पूर्ण बहुमत से दोनों सदनों द्वारा पारित संशोधन विधान पर निर्वाचकों का निर्णय प्राप्त करने के लिये उनको प्रस्तुत किया जायेगा। यदि दोनों सदन प्रस्तावित संशोधन पर एकमत नहीं हैं तो गवर्नर जनरल को संशोधन के लिये अंतिम प्रस्तावित विधान को निर्वाचकों के पास