संविधान (तृतीय संशोधन) विधेयक, 1954 - Page 222

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उनका निर्णय जानने हेतु भेजने का अधिकार होता है और फिर ये शर्तें भी होती हैं यदि किसी राज्य में अधिकांश निर्वाचक प्रस्तावित विधान के पक्ष में मतदान करें और सभी निर्वाचकों की अधिकांश संख्या भी प्रस्तावित विधान को मंजूरी दे, तभी प्रस्तावित विधान सम्राट की अनुमति से संविधान का अंग बन सकता है। शर्तें ये हैं कि सर्वप्रथम दोनों सदनों को पूर्ण बहुमत से प्रस्तावित विधान पास करना चाहिए। यदि वे परस्पर सहमत नहीं होते हैं अथवा एकमत नहीं होते हैं तो फिर गवर्नर-जनरल को यह मामला निर्वाचकों के पास भेजने का अधिकार दिया जाता है। पहली स्थिति में भी मामलों को निर्वाचकों के पास भेजना चाहिए और फिर भी अधिकांश निर्वाचकों द्वारा विधेयक के पख में मतदान किये जाने मात्र से ही नहीं बल्कि अधिकांश राज्य, अधिकांश निर्वाचक और कुल निर्वाचकों की बहुतसंख्या भी विधेयक का अनुमोदन करे तभी संविधान में संशोधन किया जा सकता है।

अब अमरीका का संविधान लीजिए। अमरीका के संविधान में अनुच्छेद 5 है। जिसमें संविधान में संशोधन करने के बारे में लिखा है जो इस प्रकार है : ‘‘जब दोनों सदनों के दो तिहाई सदस्य किसी संशोधन का प्रस्ताव करें, तभी उस पर आगे कार्यवाही की जा सकती है। पहली शर्त यह है कि दोनों सदनों को दो-तिहाई मत से संशोधनकारी विधेयक पास करना चाहिए या दो तिहाई राज्य अपना सम्मेलन बुलाएं, अर्थात् निर्वाचकों का सम्मेलन बुलाएं और वे राज्य सरकार द्वारा दिये गये सुझाव के अनुसार संविधान संशोधन का प्रस्ताव रखें। ऐसे संशोधन तभी विधान का रूप लेंगे, जब तीन-चौथाई राज्य या तीन चौथाई राज्यों के सम्मेलन उसका अनुसमर्थन करेंगे। मैंने केवल अपनी बात को स्पष्ट करने के लिये इन दो संविधानों का सहारा लिया है। अन्य संविधानों में ऐसे अनेक उपबंध मिल जायेंगे।

संविधान संशोधन के संबंध में इस उपबंध का मूल सिद्धांत क्या है? मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि आस्ट्रेलिया और अमरीका में संविधान से संबंधित इन दो अनुच्छेदों का यदि कोई छात्र अध्ययन करे तो उसे पता चलेगा कि संविधान में संशोधन करने के संबन्ध में कोई कार्यवाही करने के लिये दो सिद्धांत काम करते हैं। पहला सिद्धांत यह है कि इस संबन्ध में लोगों को जानकारी दी जानी चाहिए। जनता को पता होना चाहिए कि सरकार संविधान में संशोधन करने जा रही है। दूसरा सिद्धांत यह है कि उसके लिये मतदातओं की सहमति होनी चाहिए चाहे प्रत्यक्ष रूप से हो, जैसे अमेरिका में होता है और चाहे राज्यों द्वारा परोक्ष रूप से अनुसमर्थनकारी संकल्प के माध्यम से।

अब, महोदय, क्या हमारी सरकार इन मूलभूत नियमों का पालन कर रही है? यह बिल्कुल सच है कि हमारा संविधान बहुत लचीला है। यह कठोर नहीं है, अमेरिकी संविधान या आस्ट्रेलियाई संविधान जैसी इसमें आधी भी कठोरता नहीं है। जिन लोगों ने हमारा संविधान बनाया है वे भली-भांति जानते थे कि स्थिति को लचीला रहने दिया