अस्पश्श्यता अपराध विधेयक 1954 - Page 227

210 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इस मामले पर विचार किया जाना चाहिए और अनुच्छेद 372 खण्ड (2) के उपबन्धों के अधीन सरकार को इसका निपटान करना चाहिए। अब मुझे पता नहीं कि विधि मंत्रालय ने क्या किया है अथवा गृह मंत्रालय ने क्या किया है। मेरे विचार में, उस पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी होगी। मैंने अपने मार्गदर्शन के लिये कुछ विधियों की एक सूची बनायी थी जिनमें, मेरे विचार में संविधान के अनुरूप बनाने के लिए परिवर्तन करने की नितान्त आवश्यकता है। इनमें सब से पहला मद्रास रेगुलेशन 1816 का XI है। ईस्ट इंडिया कम्पनी ने यह आपराधिक कानून बनाया था। उसमें एक प्रावधान है, सम्भवतः धारा 10 है जिसमें लिखा है कि यदि अपराधी निचली जातियों का हो तो उसको जो दंड दिया जाए वह लकड़ी के शिकंजे में अपराधी के पांव फंसाकर बैठाये रखने का हो। यह दंड उस व्यक्ति को नहीं दिया जाता है जो ऊंची जाति का है। महोदय, ऐसा नहीं होना चाहिए यह विनियम (रेगुलेशन) भेदभावपूर्ण है और इसको निरस्त कर देना चाहिए। तत्पश्चात्, अगली मद जिसका मैं उल्लेख करना चाहता हूँ वह है 1890 का बम्बई म्युनिसिपल सर्वेंट्स ऐक्ट अ। इस अधिनियम में यह प्रावधान है सम्भवतः उसकी धारा 3 है,- कि यदि नगरपालिका का कोई कर्मचारी, जिसके कर्तव्य अधिनियम के साथ संलग्न अनुसूची के अंतर्गत आते हैं, बिना अनुमति के अपने काम से अनुपस्थित रहता है या कम से कम तीन महीने की लिखित रूप में सूचना दिये बिना अपने पद से त्याग-पत्र देता है, तो उसे कारावास की सजा दी जाएगी। अब यह एक सुस्थापित सिद्धांत है कि रोजगार की संविदा केवल सिविल संविदा होती है जिसके लिए यदि दंड दिया भी जाना है तो वह केवल शास्ति तक सीमित रहना चाहिये, उसके लिये कारावास का दण्ड नहीं होना चाहिए। परन्तु नगरपालिका की यह विधि अभी तक कानून की पुस्तक में मौजूद है। इसका परिणाम यह है कि इस अधिनियम के अधीन-यदि मेरे माननीय मित्र अनुसूची को देखें तो उन्हें पता चलेगा कि-अनुसूची में वस्तुतः उन्हीं लोगों का उल्लेख है, यद्यपि कर्तव्य के रूप में जो सफाई कर्मचारी हैं या सड़कों पर सफाई का काम करते हैं, आदि और उनमें अधिकांश अनुसूचित जातियों के लोग अथवा अस्पृश्य होते हैं-वे हड़ताल करने की स्थिति में भी नहीं होते क्योंकि त्याग-पत्र देने की शर्त के अनुसार तीन महीने की पूर्व सूचना दी जानी चाहिए। जहाँ तक इस अधिनियम का संबंध है अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है।

अब मैं एक अन्य मद अर्थात् 1916 के यू. पी. म्यूनिसिपिलेटीज एक्ट II को लेता हूँं। मेरे विचार में इसकी धारा 85 है। इस धारा के प्रावधान भी लगभग बम्बई म्यूनिसिपिल सर्वेंट्स एक्ट के प्रावधानों जैसे हैं। इसमें भी कहा गया है कि बोर्ड द्वारा नियुक्त कोई सफाई कर्मचारी, जो सेवा की लिखित संविदा की शर्तों के अतिरिक्त अथवा बिना किसी उचित कारण के, जिसकी पूर्व सूचना दी गयी हो, त्याग-पत्र देता