अस्पश्श्यता अपराध विधेयक 1954 - Page 229

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के अधीन अधिकारी माना जाता है, के लिये बिल्कुल संभव है कि वह चाहता हो कि अनुसूचित जाति का पूरा समुदाय उसके अधीन काम करे, सरकारी काम ही नहीं बल्कि उसके निजी काम भी करे। उदाहरण के लिये, गांव के किसी पटेल के घर में कोई मृत्यु हो जाये तो वह संबंधियों को मृत्यु की सूचना देने के लिये एक पोस्ट कार्ड नहीं भेजेगा, क्योंकि यह अपमानजनक तरीका है। वह इस काम के लिये गांव से ग्राम-सेवक जो इस नाम से जाने जाते हैं, को भेजने पर जोर देगा कि वह मीलों तक पैदल चलकर यह संदेश दे कि पटेल के घर में किसी की मृत्यु हो गयी है। यदि पटेल के घर में कोई विवाहित लड़की आती है और वापिस जाना चाहती है तो वह चाहेगा कि एक या दो ग्राम-सेवक उसके साथ जायें, उसकी चौकसी करें और सुनिश्चित करें कि वह अपनी ससुराल सुरक्षित पहुंच जाए। यदि कोई शादी होती है तो वह उम्मीद करेगा कि सारा समुदाय लकडि़याँ तोड़े और बिना किसी पारिश्रमिक के सब प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराये। यदि वे ऐसा करने से इंकार करें तो वह उनकी शिकायत कलेक्टर के पास कर सकता है कि उसके ग्राम-सेवक अपने कर्तव्य का पालन नहीं करते हैं और कलेक्टर अधिनियम के अधीन उन पर जुर्माना लगा सकता है। अथवा उनकी भूमि छीन सकता है और उनको वहाँ से निकाल सकता है। मुझे यह बात बहुत विचित्र लगती है कि क्या यह कानून संविधान में निहित मूल अधिकारों के विरुद्ध नहीं है और क्या विधि विभाग अथवा गृह विभाग को इसे परिवर्तन नहीं करना चाहिए।

दो अन्य अधिनियम भी हैं जो बम्बई हेरिडेटरी विलेज आफिसर्स एक्ट से संबंधित हैं। एक का नाम बम्बई रेवेन्यू ज्यूरिस्डिक्शन एक्ट है और दूसरा पेंशन एक्ट है (गृह मंत्री को अपने स्थान से उठते हुए देख कर) मेरे माननीय मित्र संभवतः असुविधा महसूस कर रहे हैं।

डॉ. के. एन. काटजू : बल्कि मैं तो बहुत आराम से हूँ।

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डॉ. बी.आर. अम्बेडकर : मैं ज्यों-ज्यों आगे बढूंगा, असुविधा भी बढ़ती

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जायेगी।

इन दोनों अधिनियमों के कारण अधिकारियों, निदेशक अथवा आयुक्त या मंत्री द्वारा किये गये किसी भी अनुचित व्यवहार के विरुद्ध न्यायपालिका तक पहुंचने में बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ता है। न्यायालयों से भी कोई सहायता नहीं मिलती क्योंकि राजस्व अधिकार-क्षेत्र अधिनियम में लिखा है कि, कलेक्टर, जो कार्यपालक अधिकारी होता है, कि निर्णय में परिवर्तन, फेर-बदल अथवा पुनरीक्षण करने की शक्ति न्यायालय के अधिकार-क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आती। पेंशन अधिनियम में लिखा है कि कोई भी व्यक्ति जिसे कोई इनाम दिया जाता है, न्यायालय में नहीं