संविधान (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 1954 - Page 242

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थी, राजा का स्वर्ग में जाना नियत था।

जब देश में मुसलमानों का शासन हुआ, तो उन्होंने उन मूल अधिकारों को हिन्दू राजाओं से छीन लिया जिन्हें हिंदू राजाओं ने ब्राह्मणों और गायों को दे रखा था। दुर्भाग्यवश गाय ने अपने केवल जिन्दा रहने के अधिकार को ही नहीं खोया बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की शिकार हो गई। यही ब्राह्मणों की दशा में हुआ। मुसलमानों ने मुसलमानों को विशेषाधिकार दिये और गैर-मुसलमानों को कोई अधिकार नहीं दिये। इस देश में मुसिलम शासन समाप्त होने के पश्चात् अंग्रेजों का शासन हुआ। कोई भी व्यक्ति, वर्ष 1772 से 1935 तक पारित हुए भारत सरकार के विभिन्न अधिनियमों की जांच करें, तो उसे यह पता चल जायेगा कि भारत सरकार के उन अधिनियमों में से किसी भी अधिनियम में मूल अधिकारों जैसी कोई भी बात नहीं है, जो संसद ने देश के प्रशासन के लिए पारित किये थे। वर्ष 1947 या इसके आस-पास जब इस देश में स्वराज एक सच्चाई बन गई तब मूल अधिकारों का विचार पैदा हुआ। हमारे संविधान में पहली बार मूल अधिकारों को मूर्तरूप दिया गया। यह बहुत आश्चर्य की बात है कि यद्यपि इस देश में विदेशी शासन कर रहे थे किसी भी व्यक्ति ने मूल अधिकारों के लिए अधिनियम के सम्बन्ध में कभी कोई आन्दोलन नहीं किया। काँग्रेस 1885 में अस्त्तिव में आई। प्रत्येक व्यक्ति को कॉंग्रेस द्वारा पारित वार्षिक संकल्पों की जांच करनी चाहिए। उन्होंने मूल अधिकारों के सम्बन्ध में कभी कोई मांग नहीं की।

बाबू गोपीनाथ सिंह (उत्तर प्रदेश) : क्या आपने 1931 के काँग्रेस के कराची

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प्रस्तावों को पढ़ा है?

डॉ. अम्बेडकर : ठीक है, मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा था कि जब वे संविधान बनायेंगे, तब उनको मूल अधिकार दिये जायेंगे। मैं अब उस बात पर आ रहा हूँ, जैसाकि मैं कहता हूँ, एक बहुत ही अनोखी टिप्पणी है कि पहले पहल काँग्रेस को जो लोग चला रहे थे उनमें कोई भी भारतीय और भारतवासी लोग असाधारण बुद्धिजीवी थे। वे साधारण व्यक्ति भी नहीं थे, वे बहुत विद्वान थे, वे बहुत जागरूक थे, जहाँ तक मेरी जानकारी है उनमें से किसी व्यक्ति ने मूल अधिकारों के लिए मांग नहीं की। लेकिन जैसे ही स्वराज प्राप्त हुआ, मूल अधिकारों की मांग की गई। यह एक विचारणीय मामला है कि ऐसा क्यों हुआ? निःसंदेह विभिन्न व्यक्ति विभिन्न प्रकार के उत्तर देंगे। लेकिन, मेरा उत्तर बहुत साधारण है। मेरा उत्तर बहुत साधारण है। मेरा उत्तर यह है- इसका कारण यह है कि जब देश में अंग्रेजों का शासन था, भारतवासियों ने मूल अधिकारों की मांग क्यों नहीं की। यद्यपि अपने शासन के एक पहलू के रूप में अंग्रेजों का साम्राज्य था, फिर भी इस में कोई संदेह नहीं