संविधान (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 1954 - Page 245

228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अधिनियमित है, अर्थात् बाजार मूल्य तथा 15 प्रतिशत प्रतिकर। यह उनके विचार में था। हमारे प्रधान मंत्री प्रतिकर के विरुद्ध थे। हमारे मित्र, श्री पंत ने, जो अब यहाँ हैं- और मुझे उन्हें यहाँ देखकर प्रसन्नता है- अपने जमींदारी उन्मूलन विधेयक की संविधान से पहले कल्पना की थी, उसे अभी तैयार किया जा रहा है। वे चाहते थे कि उनका विधेयक आसानी से पारित हो जाये। यह उनकी निजी समस्या थी। अतः यह तीन तरफा लड़ाई थी। और हमने इस समस्या को उनके ऊपर ही छोड़ दिया था कि वे इसे जैसे चाहे सुलझा लें। अनुच्छेद 31 के सम्बन्ध में उनका जो भी निर्णय था उन्होंने उसे केवल मूर्तरूप दिया। मेरे निर्णय के अनुसार अनुच्छेद 31 बहुत अशुभ बात है, और वह ऐसी बात है जिसे मैं देखना नहीं चाहता हूँ। यदि मैं ऐसा कह सकता हूँ और मैं ऐसा कुछ गर्व के साथ कहता हूँ कि जो संविधान देश को दिया गया है वह एक अनोखा संविधान है। ऐसा केवल मैंने ही नहीं कहा बल्कि बहुत लोगों तथा संविधान के बहुत से छात्रों ने कहा है। यह बहुत साधारण तथा बहुत ही आसान है। बहुत से प्रकाशनों ने मुझ से संविधान पर टीका लिखने के लिए कहा है और इसके लिए भारी धनराशि देने का भी वचन दिया है। लेकिन मैंने उनसे हमेशा कहा है कि संविधान पर टीका लिखना इस बात को मान्यता देना है कि संविधान खराब है और यह ऐसा है जिसे समझ पाना कठिन है। ऐसा नहीं है। कोई भी व्यक्ति जो अंग्रेजी जानता है वह संविधान को समझ सकता है। अतः टीका आवश्यक नहीं है।

डॉ. अनूप सिंह (पंजाब) : पिछली बार जब आप बोले थे आपने कहा था कि मैं संविधान को जला दूंगा।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : क्या आप उसका उत्तर चाहते हैं? मैं यहाँ आपको उसका सही जवाब दूंगा।

मेरे मित्र कहते हैं कि पिछली बार जब मैं बोला था तो मैंने कहा था कि मैं संविधान को जला दूंगा। ठीक है, जल्दी में मैंने इसके कारण को नहीं बताया था। अब मेरे मित्र ने मुझे अवसर दिया है, इसलिए मैं इसके संबंध में कारण बताऊंगा। कारण यह है कि हमने भगवान के आने तक तथा रहने के लिए मंदिर बनाया था लेकिन उसमें भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा होने से पहले ही शैतान ने उस पर कब्जा कर लिया, हम मंदिर को तोड़ने के अलावा क्या कर सकते थे। हम यह नहीं चाहते थे कि इस पर असुरों का कब्जा हो। हम यह चाहते थे कि इस पर देवी-देवताओं का कब्जा हो। यही कारण था जिससे मैंने कहा था कि मैं इस संविधान को जला दूंगा।

श्री बी. के. पी. सिन्हा (बिहार) : मंदिर की अपेक्षा शैतान का विनाश कीजिए।

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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : आप ऐसा नहीं कर सकते हैं। हमारे में ऐसा करने