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की शक्ति नहीं है। यदि आप शतपथ ब्राह्मण के बारे में पढ़ेंगे तो आप यह देखेंगे कि सुरों को हमेशा असुरों ने परास्त किया है। और असुरों ने उस अमृत पर कब्जा कर लिया था जिसे युद्ध में जीवित रहने के लिए देवताओं को उनसे छीनकर अपने पास रखना था। महोदय, अब, मेरी बात में व्यवधान डाला जा रहा है।
माननीय उपसभापति : आपको............ में डाला जा रहा है।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : उन सभी प्रकार की बातों में जिनको मैं लेना नहीं
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चाहता हूँ।
मैं यह कह रहा था कि अनुच्छेद 31 एक ऐसा अनुच्छेद था जिसके सम्बन्ध में हम उत्तरदायी नहीं थे। फिर भी हमने उस अनुच्छेद को उतना लचीला बनाया है जितना कि हम प्रतिकर के मामले में इसे बना सकते थे। यदि सदन के सदस्य समवर्ती सूची की प्रविष्ट 42 को देखें और इसकी तुलना भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 299 से करें तो उनको यह पता चलेगा कि प्रारूपण समिति ने उपबंध को कितना लचीला बना दिया है। भारत सरकार अधिनियम की धारा 299 में जो प्रतिकर के प्रश्न को प्रभावित करती है निम्नलिखित संघटकों की व्याख्या की गई है। उनमें से एक संघटक यह था कि पूर्ण प्रतिकर होना चाहिए जिसमें उनका निःसंदेह प्रतिप्राय भूमि अर्जन अधिनियम की शर्तों के अनुसार प्रतिकर था। दूसरा संघटक कहता है कि प्रतिकर का भुगतान किया जाना चाहिए और यह कब्जे से पहले नकद दिया जाना चाहिए। यह उपबंध भारत सरकार के अधिनियम, 1935 में था। उस उपबंध को देखिये जिसे हमने समवर्ती सूची की प्रविष्टि 42 में किया है। मेरा यह विश्वास है कि सदस्यगण उस उपबंध से यह समझेंगे कि प्रतिकर के निर्णय का प्राधिकार राज्य विधानमंडलों तथा संसद दोनों को दिया गया है और हमने ऐसा क्यों किया, इसका कारण बहुत साधारण था। इसका कारण यह था कि हमने सोचा था, यदि प्रतिकर को सूची-एक और सूची-दो में बांटा जाये ताकि केन्द्र ऐसे अर्जन के मामले में उतना प्रतिकर निर्धारित कर सके जितना वह करना चाहे और प्रान्त या राज्य भी उतना प्रतिकर निर्धारित कर सके जितना निर्धारित करना वे उचित समझें। इसके परिणाम-स्वरूप देश में पूर्ण अव्यवस्था होती और यह कि इसमें कुछ हद तक एक रूपता होनी चाहिए। इसलिए राज्यों को प्रतिकर के संबंध में नियम बनाने के लिए प्राधिकार देते समय हमने संसद को भी प्राधिकार दिया था ताकि संसद एक साधारण कानून बना सकें जो सम्पूर्ण भारत पर लागू होगा और जो राज्य के किसी भी ऐसे कानून को हटा सके जो पक्षपात पूर्ण हो। इसी कारण हमने इसे समवर्ती सूची में रखा था हमने जो उपबंध किया है वह क्या है? हमने यह कहा था कि यह आवश्यक नहीं है कि सरकार को सम्पत्ति के अर्जन के लिए वास्तविक प्रतिकर देना