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लिए बिल्कुल तैयार हूँ और मैं यह कहता हूँ कि यह एक असम्भव प्रस्ताव है जिसे हमें स्वीकार करने की आवश्यकता नहीं है। मैं अब इस स्थिति में सदन का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट करना चाहूँगा कि हम ही वे लोग नहीं है जो समाजवाद लाना चाहते हैं। समाजवाद का अर्थ क्या है कोई नहीं बता सकता। यह प्रधानमंत्री का समाजवाद है, जिसके सम्बन्ध में उन्होंने खुद यह कहा था कि वे इसकी परिभाषा नहीं कर सकते हैं। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी का भी समाजवाद है; वे यह नहीं जानते हैं कि समाजवाद क्या है। और यहाँ तक कि कम्यूनिस्ट अर्थात् साम्यवादी भी.....
श्री एस. एन. द्विवेदी (उड़ीसा) : आप दोनों को नहीं जानते हैं।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं समाजवादी नहीं हूँ।
श्री एस. एन. द्विवेदी : आप यह न जानते हुए भी कि समाजवाद क्या है, इसकी आलोचना करना चाहते हैं।
माननीय उपसभापति : व्यवस्था बनाये रखें, आप अपनी बात जारी रखें।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : यहाँ तक कि वामपंथी भी कहते हैं कि उनका अपना समाजवाद है और मैं यह जानना चाहता हूँ कि तो वे अपने आप को वामपंथी क्यों कहते हैं यदि वे केवल समाजवादी हैं। यह सभी प्रकार की दहशत को समाप्त कर देगा जो ‘‘साम्यवाद’’ शब्द बहुत से लोगों के लिए है और वे आंध्रा में आसानी से विजय प्राप्त कर सकते हैं; यदि वे नाम में परिवर्तन कर लें। मैं अपने मित्र श्री पंत से जो कुछ कहना चाहता था वह यह है-मैं आशा करता हूँ कि वे मेरी बात सुन रहे हैं।
माननीय उपसभापति : वस्तुतः वे बहुत ध्यान से सुन रहे हैं।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं उनसे जो कहना चाहता था वह बहुत मजेदार है। जिस किसी व्यक्ति ने युद्ध समाप्ति के बाद ब्रिटिश पार्टी के विधायी कार्यक्रमों का अध्ययन किया है, वे यह देखेंगे कि लेबर पार्टी ने वर्ष 1945 में प्रकाशित ट्रेड यूनियन कांग्रेस की रिपार्ट के अनुसार विभिन्न उद्योगों और रेलवे सहित विभिन्न प्रकार की सेवाओं और यहाँ तक कि बैंक ऑफ इंग्लैण्ड का भी राष्ट्रीयकरण कर दिया। मैं यह नहीं समझ सका कि लेबर पार्टी ने बैंक ऑफ इंग्लैण्ड का राष्ट्रीयकरण करके उसके कार्यकरण में कितना परिवर्तन किया है। मैं मुद्रा का छात्र हूँ और मुझे बैंक ऑफ इंग्लैण्ड के बारे में कुछ जानकारी है लेकिन वहाँ यह है कि उन्होंने वहाँ ऐसा किया। लेकिन मैं अपने मित्र श्री पंत से जो कहना चाहता था, यह है कि जहाँ भी लेबर पार्टी ने राष्ट्रीयकरण किया है। उसने पूरा प्रतिकर दिया है-पूरा..................। यह कहना पड़ता है कि जितना अर्जन किया है उनके हिस्सों का बाजार मूल्य दिया है। इसलिए प्रतिकर के भुगतान