संविधान (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 1954 - Page 249

232 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से राष्ट्रीयकरण के रास्ते में कोई रूकावट नहीं आ सकती। लेकिन जैसाकि मैंने कहा था मैं उस प्रस्ताव के लिए बिल्कुल तैयार हूँ क्योंकि हिस्सों का मूल्य निवेश की गई शेयर पूंजी के बिल्कुल मुनीसिव नहीं है। यह विभिन्न प्रकार की सामाजिक परिस्थितियों के कारण है। यह एक ऐसा सामाजिक कारण है जिससे शेयरों के मूल्य में वृद्धि हुई है और इसका कोई कारण नहीं है कि एक निजी अंशधारक को स्वयं अपना सामाजिक मूल्य अलग रखने का अधिकार होना चाहिए जो अपने शेयरों के मूल्य का एक भाग बन गया है। मैं यह भी नहीं समझता हूँ ‘कि कोई प्रतिकर नहीं’ सिद्धांत को कैसे समर्थन दिया जा सकता है। रूस में सरकार कोई प्रतिकर नहीं देती, यह सच है। लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि रूस की सरकार-लोगों को रोजगार देने, उन्हें रोटी देने, उन्हें कपड़ा देने, उन्हें घर देने, उन्हें परिश्रमी बनाने तथा सभी प्रकार की मानव सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेती है। यदि सरकार उन लोगों का पेट भरने की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेती है, जिनको सरकार ने प्रतिकर से वंचित किया है, तब वस्तुतः उन परिस्थितियों में कोई प्रतिकर नहीं दिया जायेगा यह सिद्धांत वैध है। आप प्रतिकर क्यों चाहते हैं? प्रतिकर केवल इसलिए आवश्यक है कि सरकार ने किसी व्यक्ति को उसकी आजीविका कमाने के साधनों से वंचित कर दिया है। आप किसी व्यक्ति को उसकी जीविका के साधनों से वंचित नहीं कर सकते हैं और उसी समय यह नहीं कह सकते हैं ‘‘जाओ और अपना भरण-पोषण स्वयं करो’’ तो ठीक मेरी राय में, यह सिद्धांत बहुत ही बर्बर है। इसलिए इसे स्वीकार करना संभव नहीं है। लेकिन हम उस सिद्धांत को क्यों नहीं स्वीकार कर सकते हैं कि प्रतिकर से सिर्फ यह अभिप्रेत है कि वह प्रतिकर, जो संसद के कानून द्वारा निर्धारित किया गया है? क्यों नहीं? इसका अभिप्राय यह नहीं है कि संसद भूमि अर्जन अधिनियम की शर्तों के अनुसार ही कानून बनायेगी। आप भूमि अर्जन अधिनियम को निरस्त भी कर सकते हैं। आपको ऐसा करने का अधिकार है क्योंकि यह संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों के क्षेत्राधिकार में है। यह नया भूमि अर्जन अधिनियम बना सकती है और उसमें नये सिद्धांत रख सकती है। ऐसा करने में कोई हानि नहीं है और इसके करने में कोई परेशानी नहीं है। यदि आप वैसा करते हैं ठीक है, किसी भी व्यक्ति को शिकायत करने का अधिकार नहीं हो सकता क्योंकि जब आप कानून द्वारा प्रतिकर निर्धारित करने के लिए इस प्रकार का उपाय कर सकते हैं, सदन के सभी भागों को जो कुछ वे कहना चाहते हैं उन्हें वह कहने का अधिकार होगा। यह सामूहिक समझौते के परिणामस्वरूप होगा। यदि एक संसद कुछ सिद्धांतों को अच्छा मानती है और दूसरी संसद यह मानती है कि वे सिद्धांत खराब हैं, संसद उन्हें बदल सकती है। लेकिन यह सब किया जाना चाहिए और यह संसद द्वारा ही किया जा सकता है। इसलिए मेरा संसद को यह सुझाव है कि इस प्रकार के विधेयक लाने की अपेक्षा एक सुस्पष्ट विधेयक लाया जाये और जैसाकि मैं बाद में एक