8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मान लीजिए, राष्ट्रपति मामले का भिन्न रूप से निर्वचन करते हैं और कहते हैं कि ‘‘हाँ, आप निरर्हित हैं’’? तब क्या होगा? माननीय मंत्री काफी ठीक थे जब उन्होंने यह कहा कि यदि इन सदस्यों से त्यागपत्र देने के लिए कहा जाता तो इससे प्रशासन अस्त व्यस्त हो जाता। उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि इन सदस्यों को इसकी जानकारी नहीं थी कि वे नए संविधान के अधीन निरर्हित हो जाएंगे। मेरा विश्वास है, ये नेक आशय थे। इसलिए इस विधान में उन्हें समाविष्ट क्यों न कर लिया जाए? मैंने लगभग पच्चीस समितियों का उल्लेख किया है और मुझे आशा है, अन्य सभी माननीय सदस्य उनको सम्मिलित कराने के लिए दबाव डालेंगे।
डॉ. अम्बेडकर : निश्चित रूप से आपने कुछ का उल्लेख छोड़ दिया है।
श्री सिधवा : आप उन्हें जोड़ लें मुझे खुशी होगी। अन्यथा करने के बजाए आप को हमारी रक्षा करनी चाहिए। इस सदन के 50 प्रतिशत सदस्य निरर्हता का खतरा क्यों उठाए? मैं चाहता हूँ कि सरकार को इस मामले पर पुनः विचार करना चाहिए। उन्हें उसमें एक खंड सम्मिलित करना चाहिए जिसके द्वारा ऐसे सभी सदस्य, जिन्होंने मंत्रालयों द्वारा नियत सभी समितियों या किसी समिति में कार्य किया है, निरर्हित नहीं समझे जाएंगे। अथवा, उन्हें समितियों के सभी नामों को सम्मिलित करना चाहिए। मैंने दो विकल्प दिए हैं। मुझे कोई कारण दिखाई नहीं देता कि माननीय मंत्री जी को उनमें से एक को क्यों स्वीकार नहीं करना चाहिए। उसे किसी अन्य पर क्यों छोड़ना चाहिए भले ही वह राष्ट्रपति क्यों न हो? वह शुल्क की प्राप्ति को लाभ के पद के समकक्ष समझते हैं। मैं उन्हें यह बताना चाहता हूँ कि औद्योगिक वित्त निगम में ऐसे संसद सदस्य हैं जो वित्त मंत्रालय द्वारा विहित नियमों के अधीन 50/- रुपये पाते हैं। कुछ मामलों में वे 75/- रुपये भी पाते हैं। बाद में वे 40/- रुपये के लिए सहमत हो गए। यह एक ज्वलंत उदाहरण है। वे 40/- रुपये ले रहे हैं। क्या वे निरर्हित होंगे? क्या यह उचित होगा कि उन्हें निरर्हित कर दिया जाए? उनसे लिखित रूप में पूछा गया था कि क्या संबद्ध मंत्रालय ने उनसे निगम में कार्य करने के लिए अनुरोध किया था और उन्होंने वह स्वीकार कर लिया था।
पंडित ठाकुर दास भार्गव (पंजाब) : उन्होंने कुछ शुल्क वापिस कर दिया था
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और वे शुल्क उन्हें फिर से लौटा दिए गए।
श्री सिधवा : इसलिए इस मामले को हल्के तौर पर नहीं लेना चाहिए। मैं इस बारे में बहुत खुश हूँ कि सरकार यह विधेयक लाई है। यह विधेयक पिछले सत्र के दौरान इस सदन के समक्ष था। वास्तव में हम उप मंत्रियों और राज्य मंत्रियों से संबद्ध विधेयक के साथ इस पर विचार करना चाहते थे। जब नया संविधान प्रवृत्त हुआ तो हमें यह आश्वासन दिया गया था कि सदस्यों के मामले पर अलग