235
कुछ नहीं कहना है क्योंकि इसमें केवल मूल खण्ड (2) में अन्तर्विष्ट शब्दों, शब्दावली को कुछ कम करके दोबारा रखा गया है। इसलिए मुझे इसके बारे में कुछ नहीं कहना है। लेकिन खण्ड (2क) एक नई चीज है और इसकी सावधानी से जांच की जानी चाहिए। सबसे पहली बात है कि मैं इस खण्ड का अर्थ ही नहीं समझ सका हूँ। इसकी प्रधानमंत्री महोदय ने भी व्याख्या नहीं की है। और माननीय मित्र गृहमंत्री जी से भी इसकी कोई व्याख्या प्राप्त नहीं हुई है। इसे सही रूप से क्या कहने के लिए रखा गया है? यह एक रहस्यमय किस्म का खण्ड है, वह रहस्य छिपाया गया है। मुझे इस खण्ड (2क) का विश्लेषण करने दीजिए। यह क्या कहता है? संशोधन विधेयक में जो भाषा प्रयुक्त की गई है, उसको साधारण भाषा में इसे रखना, उस भाषा से बिल्कुल भिन्न है जो खण्ड में प्रयोग की गई है। ऐसा प्रतीत होता है। यदि सरकार किसी संपत्ति के स्वामित्व को खरीदती है तो वह उसके अर्जन के समान होगा और सरकार को अनुच्छेद 31 के अनुसार पूरा प्रतिकर देना होगा। यदि सरकार स्वामित्व खरीदना चाहती है तो यह अर्जन के बराबर है और सरकार प्रतिकर देने के लिए बाध्य होगी। दूसरी बात यह है कि यदि सरकार किसी सम्पत्ति का कब्जा लेती है तो कब्जा लेना भी अर्जन की कोटि में आएगा और सरकार प्रतिकर देने के लिए बाध्य होगी। दूसरी बात यह है कि यदि सरकार किसी सम्पत्ति का कब्जा लेती है तो कब्जा लेना भी अर्जन की कोटि में आएगा और सरकार अनुच्छेद 31 की शर्तों के अनुसार प्रतिकर देने के लिए बाध्य होगी।
विधेयक के खण्ड में यही कहा गया हैः यह क्या है जो अर्जन के बराबर नहीं होगा? यह क्या है इसे छोड़ दिया गया है जिसे सरकार कर सकती है। और करना चाहती है तथा अब भी प्रतिकर से बचती है? यदि स्वामित्व प्राप्त करती है तो यह कहा जाता है वह प्रतिकर का भुगतान करेगी; यदि वह कब्जा लेती है तो यह खण्ड कहता है, इसे प्रतिकर का भुगतान करना होगा क्योंकि ऐसा करना अर्जन के बराबर होगा।
श्री ताजमुल हुसैन : शोलापुर के मामले में क्या है? यह मामलों में सुधार करने के लिए केवल अस्थायी कब्जा था।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : वह निर्णय यहाँ मेरे पास है मै इस पर आऊंगा।
| v | kj |
|---|
| EcsMd | j |
|---|
ऐसा प्रतीत होता है कि केवल वह मामला जो इन दो मामलों-स्वामित्व का और कब्जे का अर्जन से अलग होगा, और वह लाइसेंस को रद्द करने का मामला है क्योंकि जब आप किसी लाइसेंस को रद्द करते हैं आप स्वामित्व का अर्जन नहीं करते हैं। और आप कब्जा नहीं लेते हैं और इसलिए लाइसेंस के रद्द होने के कारण आप प्रतिकर देने के लिए दायी नहीं बनते हैं। इस खण्ड का अभिप्राय यही है। मेरी कामना है कि यह सकारात्मक शब्दों में कहा गया जाता कि निम्नलिखित मामलों में सरकार प्रतिकर का भुगतान नहीं करेगी लेकिन अन्य तरीके से रखने पर