237
का कोई अन्य धंधा कर सकते थे जो मेरे विचार से बिल्कुल न्याय-संगत प्रस्ताव होगा। लेकिन सरकार यह नहीं करना चाहती है। सरकारी बसें चलाने के लिए वे नई बसें खरीदने को प्राथमिकता देती हैं। मंत्री महोदय को अभी इसका जवाब देना है कि वे उन व्यक्ति से पुरानी बसें क्यों नहीं खरीदना चाहेंगे जिनके लाइसेंसों को उसने रद्द किया है। इस बात का कोई उत्तर नहीं दिया गया है।
माननीय सभापति : डॉ. अम्बेडकर, आपने लगभग एक घंटा ले लिया है।
माननीय डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : महोदय हाँ, यह बिल्कुल सच है।
| vE | csMd | j |
|---|
माननीय उपाध्यक्ष : कृपया जितनी जल्दी सम्भव हो समाप्त करें।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : हाँ महोदय। मैं जो कह रहा था वह यह था कि इस
| vEcsMd | j |
|---|
प्रकार के मामलों में आदमी को उसकी जीविका के साधनों से वंचित करना और उसके साज-सामान के नुकसान के लिए प्रतिकर न देना गलत होगा। इस विषय में मैं कुछ तर्क सुनना चाहूँगा जो इस प्रकार के व्यवहार का औचित्य बताये। इसलिए मेरा अनुरोध है कि खण्ड (2क) विधान का पक्षपातपूर्ण भाग है। इसका न्याय निष्पक्षता और अच्छे व्यवहार से कोई सम्बन्ध नहीं है। जब तक मेरे मित्र कुछ समाधानप्रद स्पष्टीकरण नहीं देते हैं मैं उस खण्ड का विरोध करूंगा।
अब मैं संशोधन विधेयक के खण्ड 3 को लूंगा। मैं सबसे पहले यह कहना चाहूँगा कि खण्ड 3 में अन्तर्विष्ट उपबंध मेरी राय में अत्यधिक निरर्थक, तुच्छ और नीरस है और मैं यह नहीं जानता हूँ कि सरकार संविधान में इस खण्ड को शामिल करके क्या प्राप्त करने जा रही है। अब संशोधन विधेयक के खण्ड 3 में प्रस्तावित खण्ड (1) के उपखण्ड (छ), (ज) और (झ) के सम्बन्ध में मुझे कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि इन खण्डों के अधीन कार्यवाही करके मैं यह नहीं देखता हूँ कि किसी व्यक्ति को कोई नुकसान होने जा रहा है। अर्जन का सारांश यही है कि यह किसी व्यक्ति के हितों को नुकसान पहुंचाता है। मैं यह नहीं समझता हूँ कि इन उपखण्डों से किसी व्यक्ति को कोई नुकसान होगा और इसीलिए, मैं प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ कि इन मामलों में कोई प्रतिकर की आवश्यकता नहीं होगी।
लेकिन एक बात है जिसे इन उपखण्डों के सम्बन्ध में मैं कहना चाहूँगा और वह यह है कि यदि (छ), (ज) और (झ) इन उपखण्डों के अधीन कोई कार्यवाही की जाती है तो यह इस आधार पर ही होनी चाहिए जो लोक प्रयोजन को औचित्य पूर्ण ठहराते हैं। यह सरकार की ओर से केवल मनमानी कार्यवाही नहीं होनी चाहिए। यह एक सनक नहीं होनी चाहिए कि सरकार एक कम्पनी को दूसरी कम्पनी में मिलाना चाहती है या एक कम्पनी के प्रबंध को दूसरी कम्पनी को अंतरित करना चाहती है। ये खण्ड लोक प्रयोजन