239
नहीं समझता हूँ कि आप कितनी अधिकतम सीमा निर्धारित कर सकते हैं। इसलिए मुझे यह बिल्कुल व्यर्थ प्रतीत होता है।
दूसरी बात जिसके विषय में मैं कुछ हवाला देना चाहता हूँ वह यह है। यह कहती है कि अतिरिक्त भूमि राज्य को या अन्यथा अंतरित की जायेगी। मैं यह नहीं जानता हूँ कि ‘‘अन्यथा’’ का क्या अभिप्राय है, क्या इसका यह अभिप्राय है कि इसे किसी अन्य काश्तकार को दिया जाये; यह अर्थ हो सकता है। यदि हाँ, तो मैं चेतावनी का एक शब्द कहना चाहूँगा। मेरा यह विचार है कि देश में किसान स्वत्व से पूरा विनाश होने जा रहा है। हम क्या चाहते हैं- वह यह है यद्यपि मैं वामपंथी नहीं हूँ-रूस की सामूहिक खेती करने की पद्धति यही एक तरीका है जिससे हम अपनी कृषि समस्या को सुलझा सकते हैं। मेरे विचार में किसान स्वत्व पैदा करना और उन किसानों को भूमि सौंपना जिनके पास पैदा करने के साधन नहीं हैं।
श्री ताजमुल हुसैन : क्या उन्होंने ऐसा रूस में किया है?
माननीय उपसभापित : इसकी चिंता न करें, उन्होंने वहाँ का उदाहरण दिया है?
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं समाजवादी, वामपंथी या अन्य किसी से भी सूचना लेने के लिए तैयार हूँ। मैं इसमें कोई बुरा नहीं समझता हूँ। जैसा कि बुद्ध ने कहा है कि कोई भी चीज अचूक नहीं है। कोई भी चीज अंतिम नहीं है और प्रत्येक वस्तु की जांच होनी चाहिए।
श्री ताजमुल हुसैन : इसलिए हम डॉ. अम्बेडकर द्वारा बनाये गये संविधान का संशोधन कर रहे हैं।
श्री एस. महंती (उड़ीसा) : और आपके द्वारा पारित।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : अब खाली और बंजर भूमि के सम्बन्ध में। वह प्रस्ताव वास्तव में स्वागत योग्य प्रस्ताव है और मैं उसका समर्थन करता हूँ। लेकिन मुझे यह देखना है कि यदि आप खाली भूमि का कब्जा प्रतिकर दिए बिना लेते हैं, क्या नगरपालिका इस अधिकार को क्रियान्वित करेगी क्योंकि मुझे डर है कि अधिकांश नगर पार्षद गंदी बस्तियों में रहने वालों के मित्र हैं और इसलिए वे इस अधिकार का निष्पादन नहीं करेंगे जब तक कि कुछ और नहीं किया जाता है।
अब प्रबंध के सम्बन्ध में जो कुछ मैं कहना चाहता हूँ वह यह है। अधिकांश लोग यह महसूस नहीं करते हैं कि इसमें क्या शामिल है। यदि सरकार किसी मिल का प्रबंध इसलिए नहीं लेना चाहती क्योंकि इसका प्रबंध खराब है ऐसा करने में कोई नुकसान नहीं है। लेकिन प्रश्न यह है मान लीजिए सरकार का प्रबंध भी पिछले प्रबंध