240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की तुलना में उससे भी खराब हो जाता है और हानियाँ होती हैं, तो उन हानियों के लिए कौन उत्तरदायी होगा? मेरे विचार में, कुछ उपबंध किये जाने चाहिए। जहाँ तक भारत में राष्ट्रीयकृत उद्योगों का प्रश्न है, वे बहुत लाभदायक होते प्रतीत नहीं होते हैं। जैसा कि समाचार-पत्रों से पता चला है हमारे निगम ने एक वर्ष के भीतर हमें एक करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।
श्री एस. महंती : और लगभग 50 लाख रुपये।
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मैं यह नहीं जानता कि दूसरे निगम क्या करेंगे।
| vE | csMd | j |
|---|
लेकिन आप किसी व्यक्ति की संपत्ति का इसलिए अर्जन करते हैं क्योंकि इसका प्रबंध ठीक नहीं है और यह किसी सामाजिक कार्य के लिए ली जा रही हैं, आपको कुछ उपबंध अवश्य करने चाहिए कि जो कुछ नुकसान हो सकते हैं, उनको किसी व्यक्ति द्वारा पूरा किया जायेगा और वह उस वृद्ध व्यक्ति के सिर पर नहीं डाला जायेगा जो संपत्ति का मालिक था।
महोदय, अब एक शब्द खण्ड 5 के सम्बन्ध में। यह मुझे बहुत आपत्ति जनक प्रतीत होता है। खण्ड 5 के द्वारा हमें क्या करने के लिए कहा गया है। खण्ड 5 के द्वारा राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित कानूनों को संवैधानिक वैधता देने के लिए हमसे पूछा गया गया है। हमने उन कानूनों को नहीं देखा है। उन्हें परिचालित नहीं किया गया है; उन पर यहाँ वाद-विवाद नहीं हुआ है। और अब हमसे उनहें केवल संसद की संवैनिक शक्तियों को निष्पादित करने के लिए नहीं पूछा गया है बल्कि अधिनियम के अन्य खण्डों से उन्हें संवैधानिक प्रतिरक्षा देने के लिए भी कहा गया है। महोदय मेरे विचार से यह सदन के गौरव के लिए अपमानजनक है कि किसी राज्य द्वारा पारित उन कानूनों को वैध बनाने के लिए पूछा जाये जिन्हें हमने देखा भी नहीं है जिन पर विचार भी नहीं किया गया है। ऐसा करने के लिए सरकार के लिए यह उचित है कि इन विषयों को समवर्ती क्षेत्र में रखा जाए ताकि उन्हें संसद अपनी निहित शक्तियों द्वारा वैधता दे सके। लेकिन यह बहुत गलत बात है। क्योंकि हमने इसे पहले संशोधन में किया है जहाँ हमने संविधान में नौवीं अनुसूची जोड़ी थी। यह कोई कारण नहीं है हमें संविधान में इस अनियमितता को और भोंडेपन को क्यों बढ़ाना चाहिए। मैं बस यही कहना चाहता हूँं।
*****