242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
रहते हुए नहीं देखा और किसी ने मद्रास को तमिलियनों की देन के संबंध में कोई आपत्ति नहीं की है। कलकत्ता भी उतना ही विश्वव्यापी शहर हैं जब मैं श्रम सदस्य था तो मैं प्रायः कलकत्ता वहाँ के श्रमिकों की दशा देखने के लिए जाया करता था। और मुझे यह पता चला कि बंगाल के लोग उन लोगों को ‘‘बंगाली’’ नहीं कहते थे जो कलकत्ता में रह रहे थे उनको वे ‘‘कलकतिका’’ कहते थे। ये ‘‘कलकतियाँ’’ है। उससे यह पता चलता है कि वे बंगाली जनसंख्या के अंग नहीं थे। और उनकी यहाँ भारी आबादी है। ऐसा होते हुए भी, हमारे मित्रों, कांग्रेस पार्टी के लोगों ने कोई आपत्ति नहीं की है और न कलकतियों ने कलकत्ता को बंगालियों को दिये जाने के सम्बन्ध में कभी कोई आपत्ति की है। मेरा पहला प्रश्न मेरे मित्र श्री पंत से यह है कि यदि कलकत्ता बंगालियों को जा सकता है, और मद्रास तमिलों को जा सकता है तो बम्बई का महाराष्ट्रियनों को जाने में क्या आपत्ति है? मेरे विचार में यह एक मूल प्रश्न है जिसके विषय में महाराष्ट्रियनों को उन्हें संतुष्ट करना चाहिए। हाँ, यह कहा जाता है कि बम्बई में गुजराती आबादी है जो 15 प्रतिशत से अधिक नहीं है। और यह कि वहाँ महाराष्ट्रियनों का भी बहुमत नहीं है। यह कहा जाता है कि यही कारण है जो बम्बई के ऊपर महाराष्ट्र के दावे को बिगाड़ देता है। मुझे आश्चर्य है कि इस देश में कोई ऐसा शहर नहीं है जहाँ विदेशी नागरिकों की आबादी 15 प्रतिशत नहीं है। और यह कहा जाता है कि तथ्यों के अनुसार बम्बई की स्थिति यह है कि वहाँ 15 प्रतिशत गुजराती हैं वह अजीब है। कोई भी व्यक्ति यह दिखाने के लिए कितने ही उदाहरण दे सकता है कि हमारे शहरों में हमेशा मिली-जुली बसती होती हैं। कोई भी शहर यह दावा नहीं कर सकता है कि वहाँ सबकी एक समान आबादी है। और यदि इस तथ्य के होते हुए दूसरे शहर पश्चिम बंगाल का होने का दावा कर सकते हैं। मैं यह समझने में बिल्कुल असमर्थ हूँ कि बंबई शहर को भी उसी प्रकार का दावा क्यों नहीं करना चाहिए। कुछ व्यक्ति हैं जिन्होंने कहा है कि बंबई कभी महाराष्ट्र का नहीं था। मुझे उन लोगों की जानकारी पर आश्चर्य है। बंबई के पहले निवासी कौन थे? वे कोली, मछुआरे थे, और क्या मछुआरे यह कह सकते हैं कि वे महाराष्ट्रियन नहीं हैं? मैं यह चाहूँगा कि कोई व्यक्ति वहाँ जाये और जांच करके यह पता लगाये कि इस संबंध में कोलियों की क्या राय है जो महाराष्ट्र के मूल निवासी थे। यदि वे महिलाएं और पुरुष जिन्होंने यह ऊटपटांग आरोप लगाये हैं मैं उनकी विशेषताओं के बारे में थोड़ी जानकारी चाहता हूँ। मैं उनसे यह कहना चाहूँगा कि पुर्तगालियों के बम्बई पर कब्जा करने से भी पहले, बम्बई पर एक विधवा रानी लक्ष्मी बाई का कब्जा था और पुर्तगालियों ने इसे उससे किराये पर लिया था। यह पुर्तगालियों की भी नहीं थी। पुर्तगालियों ने इसे कभी नहीं जीता। उन्होंने इसे ले लिया। बेचारी रानी बाद में कुछ नहीं कर सकी। अंत में इसे अंग्रेजों को