राज्य पुनर्गठन विधेयक, 1956 - Page 260

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चार्ल्स द्वितीय की पत्नी को दहेज में दे दिया गया। यह इतना छोटा था कि दहेज 10 पौंड से अधिक नहीं था। यह इसलिए था कि बंबई उस समय कुछ नहीं था, इसमें कुछ कोली रहते थे। मैं मूल बम्बई का मूल नक्शा अपने साथ लाया हूँ कि यह पुर्तगालियों से अंग्रेजों के पास कब गया। अतः ऐतिहासिक रूप से, भौगोलिक रूप से और तार्किक रूप से, मैंने जो तर्क दूसरे शहरों के बारे में दिये हैं मैं यह नहीं देख सकता हूँ कि कोई व्यक्ति महाराष्ट्रियनों के इस दावे पर कैसे झगड़ा कर सकता है कि बंबई उनका है।

वस्तुतः मेरे और महाराष्ट्रियनों की राय में भारी अंतर है। शेष महाराष्ट्रियन लोग बम्बई को संयुक्त महाराष्ट्रियन के भाग के रूप में चाहते हैं। अब मैं संयुक्त महाराष्ट्र के बहुत विरुद्ध हूँ। मैं यह समझता हूँ कि महाराष्ट्रियन लोग संयुक्त महाराष्ट्र क्यों चाहते हैं। और मुझे इसके बारे में विश्वास है कि भविष्य के इतिहास के दौरान हम उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे उत्तरी संघ राज्यक्षेत्रों में किसी भी क्षेत्र से झगड़ा नहीं करने जा रहे हैं। आप संयुक्त महाराष्ट्र क्यों चाहते हो? मैं महाराष्ट्रियनों के साथ हूँ कि बंबई महाराष्ट्र का है? इसके लिए मैं पूरी शक्ति से संघर्ष करूंगा। इस प्रश्न के संबंध में बिल्कुल भी कोई संदेह नहीं हो सकता है। और इसीलिए मैंने यह सुझाव दिया था कि सरकार को बंबई को एक अलग शहर राज्य का दर्जा देना चाहिए और इसे ‘‘महाराष्ट्र शहर-राज्य’’ कहा जाना चाहिएः ताकि यह महाराष्ट्र का एक भाग बने और उसी समय इसे ‘‘क’’ श्रेणी राज्य का स्तर मिले। लेकिन चूंकि सरकार कुछ कारणों से जिन्हें समझना मेरे लिए बहुत कठिन है, बंबई शहर का दर्जा घटाकर निकोबार द्वीप समूह के बराबर करने जा रही है; मैंने उनसे अब सीधे कहा है कि मैं अपनी स्थिति को बदलता हूँ और उनसे शेष महाराष्ट्रियनों के साथ लड़ता हूँ। अब मैं महाराष्ट्र के बारे में जो कुछ कहना चाहता हूँ वह यही है।

इस प्रश्न के संबंध में कि बंबई शहर में महाराष्ट्रियनों का बहुमत नहीं है, मैं उस विचार को स्पष्ट करना चाहता हूँ। मैं सोचता हूँ कि बहुत-सी गलतफहमियाँ हैं। आबादी के कुछ आंकड़ों का पता लगाया गया है जिनसे यह पता लगता है कि बम्बई में महाराष्ट्रियनों की आबादी 46 प्रतिशत या इसके आसपास है। इसलिए वे बहुमत में नहीं हैं। महोदय, यह एक पूर्ण गलतफहमी है। कोई भी व्यक्ति जो जनगणना के विषय में जानता है, जो आंकड़े जानता है और जो बंबई शहर के अनोखे आंकड़े जानता है वह उन आंकड़ों की ओर ध्यान नहीं देगा। जनगणना के आंकड़े किसी खास दिन की परिस्थिति का रिकार्ड होते हैं जिस दिन जनगणना की जाती है। इससे सामान्य परिस्थिति मालूम नहीं होती है। उस खास दिन घटी घटना का एक विशिष्ट घटना के रूप में लिया जाता है लेकिन यह बिल्कुल विशिष्ट नहीं है। दूसरी ओर नोट