244 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किये जाने वाला महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि बम्बई शहर उन शहरों में से एक शहर है जो दूसरे शहरों से वहाँ आकर बसने और बंबई छोड़कर दूसरे शहरों में चले जाने की शर्त के अनुसार है। दुर्भाग्यवश वर्ष 1941 में जिस समय नई जनगणना की गई थी अपने भ्रम को कम करने के विचार से भारत सरकार ने बाहर से बंबई में आकर बसने वाले और वहाँ से बाहर जाने वाले वर्ष 1931 के आंकड़ों को रद्द नहीं किया। उससे यह पता नहीं चलेगा कि बाहर से आकर बसने वालों और बाहर जाने वालों की स्थिति में क्या तीव्र परिवर्तन हुआ है? मैं यह नहीं समझता हूँं कि यहाँ तक कि गैर महाराष्ट्रियन आबादी जो बहुमत में प्रतीत होती है वहाँ स्थायी रूप से बहुमत में हैं। उनमें से अधिकांश लोग मौसमी मजदूरी के लिए आते हैं। यदि वे जनगणना वाले दिन वहाँ होते हैं तब उनकी उपस्थिति को बम्बई के निवासी के रूप में रिकार्ड कर लिया जाता है। दूसरे दिन वे अपने गाँव वापस चले जाते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी जीविका के लिए पर्याप्त रूपया कमा लिया है। इन परिस्थितियों में क्या कोई व्यक्ति बंबई के नागरिकों की जनगणना के आंकड़ों को सही आंकड़े मान सकता है? मैं उस निष्कर्ष को बिल्कुल नहीं जानता हूँ। मैं जनगणना के आंकड़ों का विद्यार्थी रहा हूँ। मैंने उनका अच्छी तरह अध्ययन किया है। मैं जानता हूँ कि उनका क्या अर्थ है। इसलिए इन आंकड़ों से यह दावा करना कि महाराष्ट्रियनों की आबादी कम है यदि यह गलत नहीं तो पूर्णतः संदिग्ध है। इसका कोई महत्व नहीं है। इससे केवल यही पता चलता है कि उस विशिष्ट दिन क्या हुआ था जिस दिन जनगणना रिकार्ड की गई थी। अब मैं कह चुका हूँ कि मैं महाराष्ट्रियनों के बहुमत से सहमत नहीं हूँ, यदि मैं ऐसा कह सकता हूँ कि संयुक्त महाराष्ट्र होना चाहिए। मेरा दावा यह है कि वहाँ यह नहीं होना चाहिए। मैं उत्तर प्रदेश, राजस्थान और इन बड़े हिंदी भाषी प्रांतों के बारे में वही बात कहने जा रहा हूँ जो हमारे सामने बहुत धुंधले दिखाई देते रहे हैं। मैं उत्तर प्रदेश को उस रूप में अपने सामने खड़े हुए देखकर काँप जाता हूँ।
श्री एच. पी. सक्सेना (उत्तर प्रदेश) : भगवान आप की आत्मा की रक्षा करें।
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डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : मेरी आत्मा की रक्षा के लिए प्रार्थना न करें। मेरी आत्मा
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नहीं है। मैं बौद्ध हूँ। किसी व्यक्ति को मेरी आत्मा के लिए प्रार्थना करने का कष्ट करने की आवश्यकता नहीं है। मैं भगवान में विश्वास नहीं करता हूँ। मेरी आत्मा नहीं है। मैंने आपको इस कष्ट से मुक्त कर दिया है।
अब मुझे आश्चर्य है, मुझे यह कहना चाहिए कि आयोग को उत्तर प्रदेश को उसी रूप में रखना चाहिए था जिसमें वह है, राजस्थान को भी उसी रूप में रखना चाहिए था जिसमें वह है और विंध्य प्रदेश तथा मध्य प्रदेश दोनों को मिलाकर-एक कर देना चाहिए था।