250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
कि हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाया जाये। आप दिल्ली को राजधानी बना सकते हैं जो कुछ मौसमों में यह अच्छी हो सकती है। लेकिन आप को दक्षिण भारत में एक राजधानी बनानी चाहिए जिससे वहाँ के लोग यह महसूस कर सकें कि उनकी सरकार उनके भी पास है। मैंने किसी समय यह सुझाव दिया था कि हैदराबाद को भारत की दूसरी राजधानी बनाया जाए। यह एक ऐसा अत्यंत सुंदर शहर है जिसे मैंने भारत में देखा है। इसमें वे सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं हैं। जो एक राजधानी के लिए जरूरी हैं। एक विधानसभा और राज्य परिषद का होना आवश्यक हो सकता है। यदि ऐसा किया जाता है तो दक्षिण के लोग जिनके साथ मैंने बातचीत की है, यह महसूस करेंगे कि उन की सरकार उनके करीब है। क्योंकि यह उनसे उतनी दूर नहीं है जितनी दिल्ली है। दक्षिण के लोगों के लिए दिल्ली एक विदेशी प्रदेश की तरह है। दिल्ली का मौसम गर्म है और वहाँ अधिक समय ठहरना नहीं चाहते। मैं आशा करता हूँ कि मेरे माननीय मित्र इन मुद्दों पर विचार करेंगे।
महोदय, मैं न तो बहुत देर तक बोलने की स्थिति में हूँ और न मेरे पास अनुरोध करने के लिए बहुत से अन्य मुद्दे ही हैं। लेकिन एक बात है जिसे मैं कहना चाहता हूँ कि मैंने यह आशा की थी कि राज्य पुनर्गठन समिति की इस रिपोर्ट को केवल पार्टी के लोगों के सम्मुख ही प्रस्तुत नहीं किया जायेगा बल्कि व्यापक रूप से सब लोगों के सम्मुख प्रस्तुत किया जायेगा और उन्हें इस पर भारत के सभी नागरिकों की आम राय प्राप्त करनी चाहिए और उनके निर्णय को कार्यरूप दिया जाना चाहिए। महोदय, मुझे आशा थी कि अब हम जो फैसला, करें, वह हमेशा के लिए फैसला हो, क्योंकि आज एक माली के लिए एक पेड़ लगाना और कल उसे उखाड़ना और यह देखना कि क्या इसकी जड़ें जम गई हैं एक बहुत बेवकूफी की बात है। इस तरीके से पौधा कभी जिन्दा नहीं रह पायेगा। मैं अपने मित्र को याद दिला कर कोई सहायता नहीं कर सकता हूँ कि जो कुछ भी गलती से तय किया गया है वह हमेशा के लिए तय नहीं किया गया है। इसे तय किया जाना है। यदि आप इन बातों को अपनी पार्टी की सहायता से तय करने जा रहे हैं तो याद रखें आपकी पार्टी चिरस्थायी नहीं है। आप सभी अपनी आंखों के सामने इसके कमजोर होने के लक्षण देख सकते हैं।
यदि आप जो कुछ करना चाहते हैं वह विपक्ष की राय लिए बगैर करेंगे तो मुझे इसके बारे में थोड़ा भी संदेह नहीं है कि जब विपक्ष सत्ता में आयेगा तो वह इसे उखाड़ कर फेंक देगा और दोबारा जड़ जमायेगा। इस प्रकार की बात हमारे लिए बहुत खतरनाक होगी। महोदय, मैं बोल चुका हूँ।
श्री सी. पी. पारिख (बंबई) : माननीय सदस्य ने यह कह कर गलत वक्तव्य
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दिया है कि श्री मोरारजी देसाई ने किसी समय स्पष्ट रूप से यह कहा था कि बंबई