252 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अभी-अभी कहा है कि उन्होंने उस भावना को अति व्यक्त किया। लेकिन मैं ऐसा नहीं समझता हूँ, भाषण की शैली के अतिरिक्त उस रीति से उसकी भावना की गहनता की सत्यता को किसी व्यक्ति को चुनौती नहीं देनी चाहिए जो हम सभी को महसूस करनी चाहिए और कदाचित इससे भी अधिक उन लोगों को महसूस करना चाहिए जिनहें स्वयं में या अपने समूहों या वर्गों में उसे झेलना न पड़ा हो।
वे ऐसे थे। अतः वे इसके प्रतीक हो गये। लेकिन संसद में हम उन्हें बहुत सी अन्य बातों के लिए याद करते हैं विशेष रूप से उनकी उस विशिष्ट भूमिका के लिए जो उन्होंने संविधान की रचना करने में निभाई। और शायद वह बात उनके अन्य कार्यकलापों की अपेक्षा बहुत समय तक याद की जायेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि इस सदन का प्रत्येक सदस्य हमसे यह अपेक्षा करेगा कि उनके परिवार को हमारी तरफ से भारी शोक और सहानुभूति का संदेश भेजा जाए और उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया जाए।
यह इस सदन की परम्परा है। महोदय मेरा विश्वास है कि जब किसी व्यक्ति का दिल्ली में निधन होता है सदन शेष दिन के लिए स्थगित हो जाता है। महोदय इसे मैं आपके तथा सदन के ऊपर छोड़ता हूँ लेकिन मैं यह सुझाव दूंगा कि उस परम्परा का पालन करना हमारे लिए ठीक तथा उचित होगा।
माननीय उपसभापति : मैं प्रधान मंत्री द्वारा व्यक्त किये गये विचारों से स्वयं खुद को
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जोड़ना चाहूँगा। मुझे विश्वास है कि इस सदन का प्रत्येक सदस्य उन विचारों से सहमत है। हमने डॉ. अम्बेडकर के अकस्मात निधन को गहरे दुःख और शोक की भावना के साथ सुना है। वे सदन में परसों ही उपस्थित थे और अपनी सामान्य मुद्रा में थे अपने मित्रों से माजाक और बातें कर रहे थे। बहुत से लोग उनसे तथा उनके राजनैतिक दृष्टिकोण से सहमत नहीं हो सकते हैं लेकिन वे हमारे लब्ध प्रतिष्ठ सदस्य थे और उनकी बात को हमेशा सम्मान के साथ सुना जाता था। उनके भाषणों में पांडित्य, विद्वत्ता और गहन अध्ययन झलकता था तथापि वे हमारे संविधान के एक महान् शिल्पी के रूप में याद किये जायेंगे। वे यह देखने के बड़े इच्छुक थे कि हिंदू कानून और उसका अधिकांश अधिनियमित कर दिये गये हैं। यह इस सदन के लिए विशेष रूप से भरी क्षति है। और उनके सम्मान में मैं सदन से दो मिनट खड़े होने की प्रार्थना करता हूँ।
(सदन दो मिनट मौन रहा)
माननीय उपसभापति : सदन कल प्रातः 11 बजे तक के लिए स्थगित होता है।
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तत्पश्चात् सदन 11 बजकर 53 मिनट से शुक्रवार 7 दिसम्बर, 1956 को 11 बजे तक के लिए स्थगित हो गया।