10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : आप ऐसी समस्याओं को क्यों उठाना चाहते हैं जो यहाँ हैं ही नहीं?
पंडित ठाकुर दास भार्गव : उपबंध-2 में मैं पाता हूँ कि केवल मंत्री ही लाभ के पद ग्रहण कर सकते हैं। उपमंत्रियों के बारे में क्या है?
डॉ. अम्बेडकर : वे सम्मिलित हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : भाषा विस्तारित करके आप उपमंत्रियों को सम्मिलित कर सकते हैं लेकिन संसदीय सचिवों का क्या होगा?
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैं एक अवैतनिक सलाहकार था। मेरे मामले में एक वर्ष में एक रुपया था, उनके मामले में भी ऐसा ही होगा। मैंने जो कहा है वह यह है कि यदि आप ज्ञान या अनुभव का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं तो आपको उन पदों की सूची को सम्मिलित करना चाहिए जिनका धारण करना संसद-सदस्य को निरर्हित नहीं करता। मान लीजिए, कोई सदस्य किसी विषय का विशेष ज्ञान रखते हुए किसी समिति में नियुक्त किया जाता है किंतु यदि वह पद इस विधेयक के अधीन घोषित नहीं किया जाता है तब वह उसे स्वीकार करने में न्यायोचित नहीं होगा। एक ओर उसके और उसकी सेवाओं तथा दूसरी ओर, इस निरर्हता के बीच में होने से देश उसकी सेवाओं से वंचित रह जाएगा। इसलिए इस विधेयक को कायम रखकर हम ठीक ही करेंगे या कम से कम इन कारणों पर जो मैं पेश कर रहा हूँ, किए गए कुछ संशोधनों को स्वीकार कर हम ठीक ही करेंगे। अन्यथा इसका यह अर्थ होगा कि इन पांच प्रवर्गों को छूट प्राप्त है और बाकी के लिए हमें पुनः डॉ. अम्बेडकर के पास जाना पड़ेगा.....
डॉ. अम्बेडकर : मेरा कोई दुर्भाव नहीं है।
श्री सिधवा : वह उदार हैं।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैं जानता हूँ कि विधि मंत्रालय ने यह पहल नहीं की है किंतु मैं उन्हें उस रीति के लिए बधाई देता हूँ जिसमें वे अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करते हैं क्योंकि वे इस बारे में सहमत हैं कि जहाँ तक इन व्यक्तियों का संबंध है, उनकी सहायता की जानी चाहिए। किंतु क्या डॉ. अम्बेडकर के कहने का यह अर्थ है कि हर समय इस तरह का मामला होता है। हमें उनके पास जाकर उनसे बात करनी चाहिए। इसलिए उनके विधेयक के लिए बधाई देते हुए मैं उनसे विधेयक में आगे यह उपबंध सम्मिलित करना चाहता हूँ कि यदि ऐसा है और ऐसा सिद्धांत लागू किया जाता है तो निरर्हता लागू नहीं होगी। मैं आदरपूर्वक उनसे अनुरोध करूंगा कि