254 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
और हमने भी वस्तुतः विभिन्न मात्रा में विद्रोह किया है। संसद ने स्वयं भी अपने बनाये गये विधान में पुरानी उन प्रथाओं या परम्पराओं का खण्डन करने का वर्णन किया है जिनकी वजह से हमारे असंख्य लोग अपने सामान्य अधिकारों से वंचित रहे।
जब मैं डॉ. अम्बेडकर के बारे में सोचता हूँ तो मेरे दिमाग में बहुत सी बातें आती हैं। क्योंकि वे अत्यंत विवादग्रस्त व्यक्ति थे। उनके भाषण मधुर नहीं होते थे। लेकिन उनके लिए सभी भाषणों के पीछे शक्तिशाली प्रतिक्रिया और उन कुछ बातों के प्रति विद्रोह होता था जिन्होंने बहुत लम्बे समय तक हमारे समाज को दबाये रखा, सौभाग्यवश उस विद्रोह को समर्थन मिला लेकिन कदाचित उस रूप में नहीं मिला जिसमें वे चाहते लेकिन उस विद्रोह की तह में जाकर जो उपाय और सिद्धांत बने उनको संसद ने और मुझे विश्वास है प्रत्येक दल और पार्टी ने जिनके प्रतिनिधि यहाँ हैं, समर्थन दिया। अपने सार्वजनिक कार्यकलापों तथा विधायी कार्यकलापों दोनों में हमने हिंदू समाज के ऊपर लगे इस कलंक को दूर करने की भरसक कोशिश की। कोई भी अकेला व्यक्ति कानून द्वारा इसे पूरी तरह दूर नहीं कर सकता। क्योंकि इस प्रथा की बहुत गहरी जड़ें जमी हुई हैं और मुझे डर है कि यह अभी भी देश के बहुत से भागों में जारी है। भले ही इसे अवैध माना जा सकता है। यह सत्य है लेकिन मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह अपने अंतिम चरणों में है और इसके समाप्त होने में कुछ समय लग सकता है। जब कानून और जनता की राय दोनों ने उस स्थिति को समाप्त करने के लिए अधिक से अधिक दृढ़ निश्चय कर लिया हे तो यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता है? फिर भी जैसाकि मैंने कहा था डॉ. अम्बेडकर अपने तरीके से ही प्रख्यात हुए और वे सबसे अधिक उस विद्रोह के प्रतीक हो गए थे। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि हम चाहे उनसे बहुत से मामलों में सहमत हों या न हों, उनके अध्यवसाय, उनकी दृढ़ता और यदि मैं इस शब्द का इस्तेमाल कर सकता हूँ तो इस कभी-कभी इस संघर्ष के प्रति उनके विरोधियों की कटुता ने लोगों के मन को जागरूक रखा और उसने उन्हें उन मामलों के बारे में शिथिल नहीं होने दिया जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता और उससे हमारे देश में उन समूहों को जागृत करने में सहायता की जिन्हें पुराने समय में बहुत लम्बे समय तक सताया गया था। इसलिए यह दुखद है कि भारत में दलितों और उत्पीडि़तों का इतना प्रख्यात हिमायती और हमारे कार्यकलापों में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाने वाले व्यक्ति का निधन हो गया है।
जैसा कि सदन जानती है, वे मंत्री थे, हमारे मंत्रिमंडल के कई वर्षों तक सदस्य रहे थे। सरकारी कार्य में उनको सहयोग देने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मैंने उनके भाषणों को सुना है और वस्तुतः मैं उनसे पहले कई बार मिला हूँ। लेकिन मेरा उनसे कोई घनिष्ट संबंध नहीं था संविधान सभा के समय मुझे बेहतर जानने का मौका मिला था। मैंने उनको सरकार में आने के लिए निमंत्रण दिया था। कुछ