256 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हमारे भी मतभेद थे। लेकिन आज हम सभी इस बात को नहीं भूल सकते हैं कि वे हमारी जनता के अंतःकरण से उन बुराइयों को कैसे बाहर लाये जिनसे हमारी जनता के एक भाग को हमारे सामाजिक दमन की व्यवस्था के कारण परेशानियाँ उठानी पड़ीं। व्यक्तिगत रूप से मैं यह महसूस करती हूँ कि यद्यपि हमने हिंदू कोड बिल को टुकड़ों में पारित किया है, फिर भी जिन सिद्धांतों को डॉ. अम्बेडकर ने अपने मूल मसौदे में मूर्तिरूप दिया था वे अनेक दृष्टिकोणों से विवेकपूर्ण थे। हम भी उनके विशिष्ट पांडित्य के लिए उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं जिसके कारण वे सामाजिक असमानता और संकीर्ण पूर्वाग्रहों के विरुद्ध खड़े हुए और उन्होंने उन व्यक्तियों में अपना स्थान बना लिया जिन्हें संविधान की रचना करने में दिखाये गये पांडित्य के लिए याद रखेगा। मैं सदन के नेता का सहयोग करती हूँ और प्रार्थना करती हूँं कि उनकी याद में, उनको सम्मान देने के लिए इस सदन को स्थगित किया जाये।
श्री अशोक मेहता (भंडारा) : मैं डॉ. अम्बेडकर को दी गई श्रद्धाँजलि में सहयोग
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देने की कामना करता हूँ।
मुझे उनके साथ एक से अधिक बार सहयोग करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था और उनके विलक्षण एवं आकर्षित करने वाले चरित्र के बहुत पहलू थे। हम बंबई से आने वाले लोग उन्हें एक शिक्षक के रूप में याद करेंगे। हम उन्हें एक अर्थशास्त्री के रूप में याद करेंगे, हम उन्हें मजदूरों के नेता के रूप में याद करेंगे हम उन्हें एक राजनैतिक नेता के रूप में याद करेंगे। उस महान् कार्य के अतिरिक्त जो उन्होंने इस सदन में किया है और सरकार के सदस्य के रूप में जहाँ तक देश के मेरे भाग का संबंध हैं उन्होंने वहाँ नई चेतना पैदा की है। उनके कारण ही हमारे क्षेत्र के लोगों के एक बहुत बड़े भाग को सामाजिक महत्व की भावना से प्रेरित किया गया। उन्हें विश्वास की भावना दी गई। मेरा विश्वास है, यदि वे वहाँ नहीं होते, तो शायद देश का मेरा भू-भाग वह नहीं होता जो आज है।
मुझे विश्वास है कि उनकी याद को अपना सम्मान देने के लिए तथा आज सदन को स्थगन करके उनका सम्मान करने का प्रयास करने में हम केवल उनके महान् ऋण को चुका रहे हैं। हममें से बहुत से लोग उनकी उन महान सेवाओं के कारण हैं जो उन्होंने हमारे समाज को दी हैं।
श्री वि. घ. देशपांडे (गुना) : सभापति महोदय, मैं समझता हूँ कि डॉ. अम्बेडकर के निधन के समाचार से केवल संसद में ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र में एक दुःख की लहर फैल जायेगी। डॉ. अम्बेडकर ने भारत का संविधान बनाया था और उसको तैयार करने के लिए उन्होंने अधिक परिश्रम और योग्यता का परिचय दिया था। इसके अतिरिक्त डॉ. अम्बेडकर हिन्दू समाज के एक महान नेता थे हालांकि