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डॉ. अम्बेडकर ने हिन्दू समाज पर बड़े प्रहार किए, तीखे और कड़वे प्रहार किये, लेकिन मैं समझता हूँ कि उसका भी एक कारण था कि डॉ. अम्बेडकर का जन्म जिस जाति में हुआ था उनके प्रति सवर्ण हिन्दुओं ने बहुत पाप किये हैं और उन पापों को देखने के पश्चात् डॉ. अम्बेडकर का कभी इतना तीक्ष्य होना समझ में आ सकता है और यह भी हमारे पापों का फल है ऐसा मैं मानता हूँ।
डॉ. अम्बेडकर की योग्यता और पांडित्य इतना उत्कृष्ट था और इतना महान् था कि मैं समझता हूँं कि दूसरे किसी कारण से नहीं तो इसलिए कि उनका व्यक्त्तिव इतना महान था कि जिस को लेकर उन्होंने अस्पृश्यता के विरुद्ध इतना घोर संग्राम किया, डॉ. अम्बेडकर को मान देना अत्यावश्यक है। डॉ. अम्बेडकर ने अस्पृश्यता निवारण के लिये जो जीवनपर्यन्त प्रयत्न किये वे कभी भुलाये नहीं जा सकते और हालांकि उनके पहले से अस्पृश्यता निवारण का आंदोलन किसी न किसी रूप में इस देश में चलता आया है पर अस्पृश्य लोगों को एक मनुष्य के नाते खड़े होकर लड़ने और झगड़ने का काम अगर किसी ने सिखाया तो यह डॉ. अम्बेडकर ने सिखाया और उन्हें हिन्दू समाज के इस पद-दलित वर्ग को उठाया ओर उनको बताया कि वे भी दूसरों की तरह इन्सान हैं और इस नाते अस्पृश्य लोगों के प्रति की गई उनकी सेवाओं को देश कभी नहीं भूला सकेगा। आज हमारे बीच एक महान नेता उठ गया है। और मैं समझता हूँ कि उनकी मृत्यु से जो स्थान रिक्त हुआ है उसकी पूर्ति निकट भविष्य में होना मुश्किल नजर आता है। सदन के नेता ने जो उनकी मृत्यु पर दुःख प्रदर्शित किया है उसमें मैं पूरी तरह उनके साथ हूँ।
श्री फ्रेंक एंथनी (मनोनीत एंग्लो इंडियन) : मैं उस स्वतंत्र ग्रुप को उन भावनाओं
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के साथ सहयोग देना चाहूँगा जो सदन के नेता ने दी हैं।
यह मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं डॉ. अम्बेडकर को बहुत वर्षों से जानता हूँ। और मैं यह महसूस करता हूँ कि कुछ मिनटों में उन्हें पर्याप्त श्रद्धांजलि नहीं दी जा सकती है। वे बहुमुखी प्रतिभा के थे। वे केवल गहरे ही नहीं थे, वे गम्भीर विद्वान थे और जैसा कि सदन के नेता ने कहा था वे एक विवाद-ग्रस्त व्यक्ति थे। लेकिन मैं विश्वास करता हूँ कि जटिल व्यक्त्तिव के प्रभावशाली व्यक्ति थे, उनमें एक अदम्य लड़ाकू होने की विशेषता थी, और यही अदम्य भावना थी जिसने उन्हें व्यक्तिगत बुराइयों पर विजय प्राप्त करने में समर्थ बनाया जो शायद कम अडि़यल चरित्र को परास्त कर देती।
हो सकता है हम उनकी राजनीति से सहमत न हों। कदाचित हम कभी-कभी उस ढंग से भी सहमत नहीं रहे जिससे उन्होंने बातें कही थी लेकिन उनसे कटु व्यक्तिगत दुर्व्यवहार हुआ, वह जिससे उन्होंने अपने प्रारम्भिक जीवन में संघर्ष किया, के बारे में सुनने पर मैं इस बात का न्याय करने के लिए नहीं मानूं कि शायद उनकी